गोधरा कांड : कारसेवक ही थे निशाने पर

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अहमदाबाद सांप्रदायिक दंगों के लिहाज से गोधरा कांड देश का सबसे भीषणतम प्रकरण था, निश्चित तौर पर हमलावरों के निशाने पर साबरमती एक्सप्रेस के एस-6 में सवार कारसेवक ही थे। कोर्ट ने सवाल उठाया कि अगर ऐसा नहीं होता तो महज 10 मिनट में गोधरा स्टेशन के पास कैसे 140 लीटर पेट्रोल  पहुंच गया और कैसे पांच सौ लोग एकत्र हो गए।

गोधरा कांड के लिए गठित विशेष अदालत के सेशन जन पीआर पटेल ने गोधरा कांड पर अपने फैसले में जिन तथ्यों को उजागर किया वह काफी चौंकाने वाला है। साढ़े नौ सौ पेज के अपने फैसले में अदालत ने सभी तथ्यों का बारीकी से निरीक्षण करने के बाद इस बात का भी खंडन किया है कि 27 फरवरी 2002 को गोधरा स्टेशन पर कथित मुस्लिम लड़कियों से छेड़खानी की गई हो।

अदालत ने कहा है कि 26 फरवरी की रात्रि को अमन गेस्ट के कमरा नंबर 8 में हुई बैठक में गेस्ट हाउस मालिक रज्जाक कुरकुर के साथ सलीम पानवाला, हाजी बिलाल, फारुक बाणो ने मिलकर इस साजिश को रचा था। इसके बाद लड़की की छेड़खानी की बात फैलाना तथा माइक से भड़काने वाली भाषा में लोगों से अपील करना दर्शाता है कि यह पूर्व नियोजित षड्यंत्र के तहत ही किया गया था।

न्यायाधीश पटेल ने कहा कि साजिश के तहत ही गेस्ट हाउस मे रखे पेट्रोल के कनस्तर लेकर सलीम पानवाला व सलीम जर्दा की मदद से शौकत लालू, इमरान शेरू, हसन चरखा तथा जामीन बिरयामीन सिग्लन फलिया पर पहुंचे थे। हसन लतिका ने एस 6 तथा एस 7 कोच के बीच की वेस्टब्यूअल शीट को काटकर पेट्रोल भीतर पहुंचाया जबकि हसन लालू ने बाहर से जलते कपड़े एस 6 कोच पर फेंका था।

न्यायालय की ओर से गत 1 मार्च को गोधरा कांड में लिप्त 11 दोषियों को सजा ए मौत तथा 20 लोगों को उम्र कैद की सजा सुनाई जा चुकी है जबकि इससे पहले 22 फरवरी को इसी मामले में मुख्य आरोपी मौलाना उमरजी समेत 63 लोगों को बरी भी कर दिया गया।

न्यायालय का अनुमान है कि इस हादसे में रेलवे की करीब 18 लाख की राष्ट्रीय संपत्ति नुकसान किया गया। गोधरा कांड साजिश को हिंदुओं के खिलाफ बदले की भावना से की गई कार्यवाही मानते हुए कहा है कि इसमें सीधे तौर पर कारसेवकों को ही निशाना बनाए जाने का षड्यंत्र माना है।

गोधरा गुजरात का सबसे संवेदनशील इलाका माना जाता है जहां अब तक करीब एक दर्जन बार दंगे हुए हैं। यहां वर्ष 1965, 1969, 9171, 1980, 1982, 1988, 1989, 1990, 1992 में भी दंगे हुए थे। हालांकि विशेष सरकारी वकील जेएम पंचाल अदालत के फैसले पर पूरी तरह संतुष्टि जताते हैं लेकिन गुजरात सरकार के प्रवक्ता एवं मंत्री जयनारायण व्यास ने साफ कहा है कि गोधरा मामले में बरी किए गए लोगों के खिलाफ उच्च अदालत में अपील के लिए अभी तीन महीने का समय है, सरकार फैसले का अध्ययन करेगी तथा जरूरी हुआ तो बरी किए गए आरोपियों के खिलाफ अदालत जाएगी।

दूसरी ओर बचाव पक्ष के वकील आइएम मुंशी तथा नानावटी आयोग में दंगा पीडि़तों की ओर से न्यायिक लड़ाई लड़ रहे वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल सिन्हा को अब भी गोधरा कांड के इस फैसले पर भरोसा नहीं है।

उनका कहना है कि पूर्व नियोजित साजिश की बात इसलिए ठीक नहीं बैठती क्योंकि पहली कहानी में मुख्य आरोपी बताए गए मौलाना उमरजी बरी हो गए हैं। इसके अलावा मुख्य व चश्मदीद गवाहों के बयान भी एक से डेढ़ वर्ष बाद लिए गए इसलिए उनकी सत्यता व निष्पक्षता पर सवालिया निशान लगाता है।

Posted on Mar 6th, 2011
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Posted in :  हिंदुस्तान     
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