तेल में लगने वाली है आग: सरकार

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पश्चिमी एशिया और अफ्रीकी देशों का संकट न सिर्फ विश्व स्तर पर आर्थिक दिक्कतें बढ़ा रहा है, बल्कि घरेलू अर्थव्यवस्था को भी मुसीबत में डाल रहा है। सरकार को अब इसकी आंच कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों के जरिए महसूस होने लगी है। इसका असर आने वाले दिनों में अर्थव्यवस्था पर भी दिख सकता है।

वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने शनिवार को रिजर्व बैंक के बोर्ड के साथ बैठक के बाद कहा कि सरकार इन चुनौतियों से निपटने के उपाय कर रही है। यूरोप का कर्ज संकट भी देश के निर्यात को प्रभावित कर रहा है। इससे पहले वित्त मंत्री ने शेयर बाजार नियामक सेबी के बोर्ड के साथ भी बैठक की।

इसमें भी अर्थव्यवस्था के समक्ष मौजूद चुनौतियों पर चर्चा हुई और सुझावों का आदान प्रदान हुआ। अफ्रीका और पश्चिम एशिया के संकट ने कच्चे तेल की कीमतों पर सबसे ज्यादा असर डाला है। क्रूड ऑयल बीते ढाई साल के उच्चतम स्तर 120 डॉलर प्रति बैरल को छू चुका है। ये स्थितियां पेट्रोल के दामों को जल्दी ही एक और बढ़ोतरी की तरफ ले जा रही हैं।

देश में अभी पेट्रो उत्पादों की कुल खपत का दो तिहाई से ज्यादा आयात से पूरा होता है। देश के आयात बिल में भी सबसे बड़ा हिस्सा पेट्रोलियम आयात का ही होता है। इसलिए तेल की कीमतों में और वृद्धि विदेश व्यापार संतुलन को बिगाड़ने के लिए काफी होगी।

वर्ष 2010-11 में दस महीने की अवधि (अप्रैल से जनवरी) के दौरान तेल आयात का बिल 7,995.70 करोड़ डॉलर तक पहुंच चुका है। यह पिछले साल की समान अवधि में किए गए तेल आयात बिल से करीब 14 प्रतिशत अधिक है।

सरकार के मुताबिक आयात बिल में यह बढ़ोतरी मूलत: कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी की वजह से ही है। वित्त मंत्री के मुताबिक चालू वित्त वर्ष में रिजर्व बैंक ने सरकार के उधारी कार्यक्रम को बखूबी निभाया है। इस बार भी निजी क्षेत्र के लिए बाजार में नकदी की कमी नहीं होने दी जाएगी।

अगले वित्त वर्ष के लिए सरकार ने 4.17 लाख करोड़ रुपये बाजार से जुटाने का लक्ष्य रखा है। जबकि चालू वित्त वर्ष में सरकार की बाजार उधारी 4.47 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है। अरब की आग से 250 डॉलर तक पहुंच सकता है कच्चा तेल लंदन, एजेंसी : अरब जगत में अशांति इसी तरह बढ़ती रही, तो विश्व बाजार में कच्चे तेल के भाव दोगुने हो सकते हैं।

तेल व्यापारी रह चुके ब्रिटेन के अंतरराष्ट्रीय विकास मंत्री एलेन डंकन ने यह चेतावनी दी है। डंकन ने 30 साल तक खाड़ी देशों में कारोबार किया है। कच्चा तेल 200 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है। जुलाई 2008 के दौरान भाव 147 डॉलर तक पहुंच गया था, जो अब तक का रिकॉर्ड है। अगर विद्रोहियों ने अरब क्षेत्र में तेल भंडारों और सऊदी अरब के आरक्षित भंडार व पाइपलाइनों को बम से उड़ाना शुरू किया, तो तेल 250 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है।

Posted on Mar 6th, 2011
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Posted in :  व्यापार     
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