नेताओं का दबाव कम हो : पूर्व नौकरशाह

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नौकरशाही को राजनीतिक दबाव से मुक्त करने की यह मुहिम अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। बढ़ते घोटालों से आजिज नौकरशाह चाहते हैं कि राजनेता अब उन्हें लिखित में आदेश दें और अधिकारियों के तबादलों व दंड में नेताओं की मनमानी न चले।

83 सेवानिवृत अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर यह गुहार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर केंद्र और राज्य सरकारों से जवाब तलब किया है। न्यायमूर्ति दलवीर भंडारी व न्यायमूर्ति दीपक वर्मा की पीठ ने पूर्व कैबिनेट सचिव टीएसआर सुब्रह्मण्यम व अन्य की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई के बाद ये नोटिस जारी किए। मामले में 4 अप्रैल को फिर सुनवाई होगी।

याचिका में प्रशासनिक तंत्र दबाव मुक्त, मजबूत और प्रभावी बनाने के लिए कोर्ट से दिशा निर्देश जारी करने की मांग की गई है। अधिकारियों ने कहा कि अदालत को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि स्वयं को मिले हर निर्देश को प्रशासनिक अधिकारी लिखित में दर्ज करें। चाहे वे निर्देश, आदेश अथवा सुझाव उसे अपने वरिष्ठ प्रशासनिक मुखिया जैसे मंत्री आदि से मिले हों अथवा सहयोगी अधिकारी से।

याचिका में केंद्रीय स्तर पर व राज्यों में स्वतंत्र सिविल सर्विस बोर्ड अथवा कमीशन का गठन करने की मांग की गई है। तबादला और दंड के पारदर्शी नियमों को सुनिश्चित करने के लिए 2004 में केंद्र की होता कमेटी ने इसकी सिफारिश की थी।

अधिकारियो की मांग है कि एक पद पर काम करने के लिए अधिकारियों का कार्यकाल तय किया जाए ताकि नेता मनमर्जी से तबादले न कर सकें। याचिका में कहा गया है कि पिछले 60 वर्षो में करीब 50 कमेटियों और कमीशनों ने अध्ययन किया और रिपोर्ट दी लेकिन प्रभावी ढंग से लागू कुछ नहीं हो पाया। प्रशासनिक तंत्र भ्रष्टाचार, राजनीतिक दबाव के कारण नष्ट होता जा रहा है।

Posted on Mar 6th, 2011
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Posted in :  सरकारी-तंत्र     
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