डीएमके के मंत्री कल देंगे सरकार से इस्तीफा

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चेन्नई. यूपीए में डीएमके के 6 मंत्री सोमवार को यूपीए सरकार से इस्तीफे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सौंप देंगे। इधर कांग्रेस-डीएमके के बीच विवाद को सुलझाने का प्रयास आज भी जारी रहा। कांग्रेस में तमिलनाडु के प्रभारी गुलाम नबी आजाद ने आज प्रदेश के कांग्रेसी नेताओं से बातचीत की।

यूपीए से डीएमके के अलग होने के फैसले के बाद आज राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। कांग्रेस के तमिलनाडु के प्रभारी गुलाम नबी आजाद ने सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल से मुलाकात की है और उन्हें पूरी जानकारी दी। इसके अलावा उन्होंने प्रदेश के कांग्रेसी नेताओं से भी मुलाकात की।

डीएमके का समर्थन वापस लेना कांग्रेस के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। डीएमके के केंद्र में 6 मंत्री हैं, जबकि पार्टी के 18 सांसदों का भी सरकार को समर्थन प्राप्त है। अब कांग्रेस ने अपनी नजर समाजवादी पार्टी पर टिका दी हैं। सपा के पास संसद में 22 सदस्य हैं। हालांकि मुलायम सिंह यादव ने इस मुद्दे पर रविवार को अपने पत्ते नहीं खोले। लखनऊ में आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि कांग्रेस और डीएमके का आपसी झगड़ा है, जो सुलझ जाएगा। और यदि हम यूपीए को समर्थन देते हैं तो हमें क्या मिलेगा।

रविवार को डीएमके की भी महत्वपूर्ण बैठक चेन्नई में हुई। माना जा रहा है कि डीएमके को कांग्रेस के जवाब का इंतजार है। लेकिन कांग्रेस ने डीएमके से कोई संपर्क नहीं साधा है।

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे पर कांग्रेस के साथ बातचीत विफल रहने के बाद द्रमुक ने केंद्र की यूपीए सरकार से हटने का शनिवार को ऐलान किया था। चेन्नई में द्रमुक की बैठक के बाद पार्टी के सुप्रीमो व राज्य के मुख्यमंत्री एम करुणानिधि ने साफ कहा कि केंद्रीय कैबिनेट से ये मंत्री हटेंगे। लेकिन पार्टी संकट के समय मनमोहन सिंह सरकार को मुद्दों पर आधारित समर्थन देगी।

डीएमके नेता टीआर बालू ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से चर्चा भी की है। बाद में उन्होंने बताया कि केंद्र में सभी 6 डीएमके मंत्री सोमवार को प्रधानमंत्री को इस्तीफा सौंप देंगे।
हालांकि कांग्रेस ने अभी तमिलनाडु की दूसरी बड़ी पार्टी एआईएडीएमके से भी कोई संपर्क नहीं साधा है, लेकिन जयललिता पहले ही कांग्रेस को आश्वासन दे चुकी हैं कि डीएमके के केंद्र सरकार से अलग होने की स्थिति में भी यूपीए का बहुमत बना रहेगा और वे इसके लिए पूरे प्रयास करेंगीं।

तीन सीटें बनी अड़चन:

करुणानिधि के मुताबिक, कांग्रेस पहले 60 सीटों के लिए राजी हो गई थी। लेकिन फिर उसने 63 सीटों की मांग रखी। उन्होंने कहा, ‘इससे संदेह बढ़ा कि कहीं कांग्रेस हमें यूपीए से बाहर निकालने की कोशिश तो नहीं कर रही। इन परिस्थितियों में हमें सोचना पड़ा कि सरकार में रहें या नहीं।’ द्रमुक तथा कांग्रेस के बीच 2004 से गठबंधन चला आ रहा था। लेकिन ताजा फैसले ने राज्य में 13 अप्रैल से होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले दोनों पार्टियों के बीच तनाव को गहरा कर दिया।

फिलहाल मनमोहन सरकार को खतरा नहीं, सुलह की भी संभावना

द्रमुक द्वारा केंद्र सरकार से मंत्री हटाने के फैसले का केंद्र की कांग्रेस नीत गठबंधन सरकार पर तत्काल कोई असर नहीं पड़ेगा। फैसले की घोषणा के फौरन बाद द्रमुक संसदीय दल के नेता टीआर बालू ने कहा, यदि कांग्रेस करुणानिधि की शर्र्तो पर राजी हो तो पार्टी निश्चित तौर पर कांग्रेस के साथ चर्चा करेगी। उधर, दिल्ली में कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने ताजा घटनाक्रम पर सतर्क प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि फिलहाल वार्ता जारी है तथा इस हालात में भी सीटों के बंटवारे पर समझौता हो सकता है। ऐसे भी संकेत हैं कि कांग्रेस की ओर से वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी करुणानिधि से बातचीत कर सकते हैं।

Posted on Mar 6th, 2011
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Posted in :  बड़ी खबर     
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