गद्दाफी का हथियार डालने से इनकार

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लीबिया के तानाशाह शासक मुअम्‍मर गद्दाफी की वफादार सेना द्वारा किए जा रहे जमीनी, समुद्री और हवाई हमले से बुरी तरह घिर चुके प्रदर्शनकारी रास लनुफ से भागने लगे हैं और रणनीतिक तौर पर अहम इस शहर पर सेना का कब्‍जा हो गया है। विपक्षी दल नेशनल काउंसिल के नेता ने पश्चिमी देशों से अनुरोध किया है कि वो लीबिया से अपने हवाई और समुद्री संपर्क तोड़ दें। उन्‍होंने दावा किया कि लीबिया की सेना का लोगों पर कहर बरप रहा है।

इस बीच फ्रांस और ब्रिटेन ने गद्दाफी की ओर से अपनी जनता पर रसायनिक हथियार बरसाने की स्थिति में लीबिया पर हमले की तैयारी कर ली है। फ्रांस के राष्‍ट्रपति निकोलस सरकोजी ने लीबिया के मौजूदा संकट पर विचार विमर्श के लिए यूरोपीय देशों की आपात बैठक में यह ऐलान किया। हालांकि उन्‍होंने कहा कि लीबिया में नाटो या सैन्‍य दखल के बारे में उन्‍हें आपत्ति है क्‍योंकि यह मसला अरब जगत का है।

लेकिन सरकोजी और ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरून का कहना है कि यदि संयुक्‍त राष्‍ट्र, अरब लीग और लीबिया का विपक्ष ऐसा चाहते हैं तो वो लीबिया पर हमला करने को तैयार हैं।

लीबिया में पिछले 23 दिनों से चली आ रही हिंसा जारी है। गद्दाफी समर्थक सेनाओं ने जनता के कब्जे वाले हिस्से फिर छीन लिए हैं। लेकिन फ्रांस पहला देश हो गया है, जिसने जनता के संगठन को लीबिया का सही प्रतिनिधि मानते हुए मान्यता दे दी है।

लीबिया के नेता मुअम्मर गद्दाफी के बेटे सैफ-अल-इस्लाम ने कहा है कि वे कभी भी जनता के सामने समर्पण नहीं करेंगे। ब्रिटिश मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि वे लीबिया के लिए लड़ेंगे, और लड़ते लड़ते ही मरना पसंद करेंगे। कई विशेषज्ञों का भी मानना है कि गद्दाफी कभी भी समर्पण नहीं करेगें और या तो उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा, या फिर वे आत्महत्या कर लेंगे।

इस्लाम ने कहा कि फ्रांस या कोई और देश, लीबिया की जनता से बात करे तो उन्हें पता चलेगा कि गद्दाफी ही पूरी जनता के प्रतिनिधि हैं। गद्दाफी के बेटे ने कहा कि ये हमारा देश है और हम यहां कभी भी नाटो या अमेरिकी सेनाओं की घुसपैठ नहीं होने देंगे।

क्या आत्महत्या करेंगे गद्दाफी?
गद्दाफी के खिलाफ जनता के आंदोलन को करीब 23 दिन हो गए हैं। मिस्र में राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक के खिलाफ आंदोलन 18 दिन में खत्म हो गया था, जबकि ट्यूनिशिया में आंदोलन करीब 29 दिन चला था। राजनीतिक विश्लेषकों अब इस बात का आंकलन कर रहे हैं कि गद्दाफी का राज कितने दिन चलेगा। यह साफ है कि गद्दाफी देश नहीं छोड़ेंगे। वे जिद्दी प्रवृत्ति के हैं और वे अंत तक लड़ेंगे। या तो वे गिरफ्तार होंगे, या कोई उनकी हत्या करेगा। और यदि फिर भी कोई चारा नहीं बचेगा, तो वे आत्महत्या करना पसंद करेंगे। राजनीतिक मामलों के विशेषज्ञ सामी मोबयद के अनुसार वे जर्मनी के नेता एडोल्फ हिटलर की तरह ऐसा कर सकते हैं। लेकिन साथ ही उन्होंने कहा कि बाहर से जितना बहादुर दिखते हैं, अंदर से उतने ही कमजोर और असुरक्षित भी हैं। उनका व्यवहार, रंगीन वेशभूषा से साफ है कि वे अपनी कमजोरी छुपाने का प्रयास करते हैं।

जनता के लड़ाकों को झटका
लीबिया के तानाशाह मुअम्मर गद्दाफी समर्थक सेनाओं ने कई शहरों पर राकेट हमले और हवाई हमले किए हैं, जिससे जनता के लड़ाकों को पीछे हटना पड़ा है। देश के पूर्वी हिस्से में जबर्दस्त लड़ाई जारी है और अब गद्दाफी समर्थक जनता के कब्जे से शहर वापस छीनने का प्रयास कर रहे हैं। जनता के पास हथियारों की कमी है और अब गद्दाफी समर्थक उन पर हावी हो रहे हैं। जनता ने लीबिया के कई हिस्सों पर कब्जे के बाद, त्रिपोली के इर्द गिर्द जमा होना शुरू कर दिया था। लेकिन अब गद्दाफी समर्थकों ने हमले के बाद वे वापस लौट रहे हैं।

अमेरिका ने बढ़ाया दबाव
व्हाइट हाउस ने लीबिया के तानाशाह मुअम्मर गद्दाफी को अलग थलग करने और सत्ता से बाहर करने को लेकर पांच बिंदु कार्यक्रम तय किया है। अमेरिका की विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने कहा कि वे अगले सप्ताह लीबिया के जनता समर्थक नेताओं से मुलाकात करेंगीं और पता करेंगीं कि वे किस तरह की मदद चाहते हैं। हालांकि अमेरिका ने अभी जनता समर्थकों को मान्यता नहीं दी है। नाटो ने अबी तक लीबिया को नो फ्लाइंग जोन घोषित करने के बारे में कोई निर्णय नहीं लिया है। गुरुवार को नाटो के 28 सदस्य देशों की इस बारे में बैठक थी, लेकिन कोई भी निर्णय अगले सप्ताह तक के लिए टाल दिया गया है।

फ्रांस जनता के संगठन को मान्यता देने वाला पहला देश
फ्रांस ने लीबिया में सरकार विरोधियों को मान्यता दे दी है और जल्दी ही जनता के कब्जे वाले क्षेत्र के लिए राजदूत भेजने की बात कही है। इसे लीबिया नेशनल काउंसिल की जीत माना जा रहा है। फ्रांस के राष्ट्रपति निकोलस सरकोजी ने पेरिस में काउंसिल के नेता महमूद जिब्राल और अली अल एस्वी से मुलाकात की। इस के बाद फ्रांस ने घोषणा की कि वे काउंसिल को ही लीबिया की जनता का सही प्रतिनिधि मानते हैं।

Posted on Mar 11th, 2011
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Posted in :  विदेश     
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