‘कंडोम के इस्‍तेमाल पर फतवा’

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कंडोम का इस्‍तेमाल समाज के लिए अच्‍छा है या बुरा?

भारत में मुस्लिम समाज इस बहस में उलझ गया है। कंडोम के इस्‍तेमाल के खिलाफ जारी कट्टरपंथियों के फतवे को उदारवादी मुसलमान ठुकरा चुके हैं। आम जनता भी इन उदारवादियों के साथ है। एक सर्वे में  कंडोम के खिलाफ जमीयत-उलेमा-ए-हिंद के फतवे पर पाठकों की राय ली तो सबसे ज्‍यादा (39 फीसदी) लोगों ने यही कहा कि कंडोम के इस्‍तेमाल पर रोक से समाज विकास और आधुनिकता से दूर हो जाएगा और 16 फीसदी लोगों ने तो यह तक कह दिया कि कंडोम के इस्‍तेमाल को कैसे रोका जा सकता है, यह सुरक्षित सेक्‍स का जरूरी साधन है। सर्वे में शामिल 29 फीसदी लोग यह मानते हैं कि इस फतवे का पालन सभी लोग करें यह जरूरी नहीं है। 16 प्रतिशत लोग इस फतवे को जायज ठ‍हराते हुए कहते हैं कि यह धार्मिक मामला है।

भारत में मुसलमानों ने भले ही कंडोम के इस्‍तेमाल पर सवाल उठाया हो, लेकिन विकसित देशों में इसे अनिवार्य मान कर अपना लिया गया है। यह एचआईवी/एड्स जैसी भयंकर बीमारी को फैलने से रोकने का कारगर हथियार है। दुनियाभर में एचआईवी एड्स के सामने आ रहे नए मामलों में 80 फीसदी से अधिक असुरक्षित यौन संबंध बनाने से होते हैं। इस समस्‍या से निजात पाना सबसे कठिन हो रहा है ऐसे में कंडोम का इस्‍तेमाल बेहद लाभदायक हो सकता है।

कितना भयावह है एड्स का खतरा?

आबादी के मामले में दुनिया के दूसरे सबसे बड़े देश भारत में करीब 24 लाख लोग एचआईवी एड्स से पीडि़त हैं। दुनियाभर में एड्स संक्रमण पर नजर रखने वाली प्रमुख संस्‍था यूएनएड्स ने नंबवर 2010 में एचआईवी एड्स से जुड़े ताजा आंकड़े पेश किए। इनमें 2009 के आखिर तक की दुनियाभर में इस बीमारी से जुड़ी तस्‍वीर दिखाई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक 2009 तक 3.33 मिलियन लोग एचआईवी एड्स से पीडित हैं। यूएनएड्स ने 2015 तक एचआईवी एड्स संक्रमण की दर में कमी करते हुए इसे आधा करने का लक्ष्‍य रखा है।एड्स से हर दिन 8000 लोगों की मौत होती है और 7600 लोग हर रोज इस बीमारी की चपेट में आ जाते हैं। रोचक यह है कि दो लाख लोगों को तो पता ही नहीं है कि उन्‍हें एड्स जैसी गंभीर बीमारी ने जकड़ लिया है। एड्स से ग्रस्‍त करीब 15 फीसदी लोगों को यह नहीं पता कि इसका इलाज संभव नहीं है। एड्स से समाज की हर पीढ़ी त्रस्‍त है।

फीमेल कंडोम बेहतर उपाय

लोग कई वर्षों से सुरक्षित सेक्‍स को बढ़ावा देते आ रहे हैं लेकिन अब भी कुछ लोग ऐसे हैं जिन्‍हें ‘फीमेल कंडोम’ के इस्‍तेमाल की जानकारी ही नहीं है। हालांकि हाल में हुए एक अध्‍ययन के मुताबिक फीमेल कंडोम इस्‍तेमाल करने वालों की संख्‍या में धीरे-धीरे इजाफा हो रहा है। यह अनचाहे गर्भ से बचने के लिए सबसे सुरक्षित उपाय भी है।अमेरिका के सैन फ्रांसिस्‍को में अधिक आरामदायक और नए डिजाइन वाले कंडोम के इस्‍तेमाल को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि यौन संक्रमण से होने वाली बीमारियों से बचा जा सके। यह शहर अमेरिका में नए किस्‍म के ‘एफसी2′ कंडोम के इस्‍तेमाल को बढ़ावा देने वाला पहला शहर बन गया है।

अमेरिका में हर दिन 17 लाख कंडोम की खपत

अमेरिकी सुरक्षित सेक्‍स के प्रति सबसे अधिक जागरुक हैं। अमेरिका के लोग बाकी दुनिया की तुलना में आठ गुना अधिक कंडोम का इस्‍तेमाल करते हैं। सुरक्षित सेक्‍स के लिए करीब 60 फीसदी अमेरिकी कंडोम का इस्‍तेमाल करते हैं। अमेरिका में हर दिन 17 लाख कंडोम की खपत है। इसके बाद सबसे अधिक कंडोम का इस्‍तेमाल करने में जापान के लोगों का नंबर आता है। सुरक्षित सेक्‍स के लिए कंडोम के इस्‍तेमाल को बढ़ावा देने के लिए हर साल 13 फरवरी को अंतरराष्‍ट्रीय कंडोम दिवस मनाया जाता है। अमेरिका में तो हर साल 14 से 18 फरवरी ‘राष्‍ट्रीय कंडोम सप्‍ताह’ भी मनाया जाता है। कंडोम दरअसल फ्रांस में एक शहर का नाम है। फ्रांस में कंडोम को ‘बचाव करने वाली वस्‍तु’ कहा जाता है क्‍योंकि यह जिंदगी बचाती है।

Posted on Mar 11th, 2011
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Posted in :  हिंदुस्तान     
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