चुनावी मौसम में सियासी रेवडि़यां बांटने की होड़

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चुनावी मौसम आते ही सियासी रेवडि़यां बांटने की होड़ शुरू हो गई है क्योंकि 2011 की गर्मियां कई दिग्गजों का राजनीतिक भविष्य तय करने जा रही हैं। यह लड़ाई सुदूर दक्षिण के तमिलनाडु और केरल से सुदूर पूर्व के बंगाल और असम तक में लड़ी जा रही है।

चार राज्यों और एक केंद्र शासित क्षेत्र में किसी न किसी दिग्गज की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। अपनी सत्ता कायम रखने के लिए जनता को लोकलुभावन योजनाओं और वादों की घुट्टी पिलाई जा रही है,

पेश है एक नजर-
तमिलनाडु
मुख्यमंत्री करुणानिधि फिर से सत्ता पाने का ख्वाब संजोए बैठे हैं। इसे साकार करने के लिए उन्होंने और उनके परिवार ने एड़ी चोटी का जोर लगा दिया है। जनता के लिए उन्होंने खजाना खोल दिया है-
1. हर बीपीएल परिवार को एक रुपये प्रति किलो के हिसाब से 20 किलो चावल मिलेंगे।
2. 31 मार्च 2006 तक किसानों द्वारा लिया गया 6,886 करोड़ रुपये का कोऑपरेटिव लोन माफ।
3. मिड डे मील योजना के तहत स्कूली बच्चों को हर हफ्ते पांच अंडे।
4. गरीब परिवारों को 1.5 करोड़ टेलिविजन सेट बांटे गए।
5. वृद्धावस्था पेंशन 200 रुपये से बढ़ाकर 500 रुपये की गई।
6. लड़कियों को शादी के लिए 10 हजार से 25 हजार रुपये तक दिए। 4.71 लाख लोगों को फायदा।
7. गर्भावस्था के दौरान बीपीएल महिलाओं को बतौर मातृत्व भत्ता 6 हजार रुपये की सहायता।
8. करुणानिधि के नाम पर स्वास्थ्य सुरक्षा योजना। एक करोड़ गरीब परिवारों को लाभ।
9. कलैगनार आवास योजना के तहत 21 लाख कच्चे मकान पक्के किए गए।
केरल : इस दक्षिणी राज्य में लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) सरकार को कांग्रेस की अगुआई वाली यूडीएफ से कड़ी चुनौती मिल सकती है। कम्युनिस्ट अल्पसंख्यकों और भूमिहीनों को अपने साथ रखने के लिए बेकरार हैं, उनकी घोषणाओं से तो ऐसा ही लगता है-
1. ग्रैजुएट और पोस्ट – ग्रैजुएट स्टडीज़ के लिए 5 हजार मुस्लिम लड़कियों को स्कॉलरशिप।
2. 60 साल से ऊपर के और सालाना आय का 50 फीसदी खेती से कमाने वाले किसानों के लिए पेंशन योजना।
3. आदिवासियों को मकान बनाने के लिए लकड़ी मुफ्त।
4. 35 लाख परिवारों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा योजना।
5. मछुआरों के 127 करोड़ रुपये के कर्ज होंगे माफ , 50 हजार परिवारों को मिलेगा लाभ।
6. एक लाख 20 हजार गरीबों को मिले भूमि अधिकार। लगभग 10 हजार आदिवासी परिवारों को जमीनें बांटीं।
7. केरल लैंड बैंक की स्थापना। मकसद सरकारी भूमि की सुरक्षा , उसे भूमिहीनों में बांटना और विकास में मदद।
असम : राज्य में बीजेपी और असम गण परिषद के बीच चुनावों से पहले समझौता न हो पाने से कांग्रेस खुश है , लेकिन उसे मालूम है कि पांच साल तक सत्ता में रहने के बाद वापसी इतनी भी आसान नहीं। ऐसे में तरुण गोगोई ने घोषणाओं की झड़ी लगा दी है -
1. अन्न सुरक्षा योजना के तहत 13 लाख बीपीएल परिवारों को प्रतिमाह 6 रुपये किलो के हिसाब से 10 किलो चावल।
2. हर साल एक लाख छात्रों को सोलर लैंप मुहैया कराए जाएंगे।
3. बीपीएल परिवारों की लड़कियों की शादी के लिए 10 हजार रुपये की मदद।
4. साढ़े तीन हजार किसानों को 75 फीसदी सब्सिडी के साथ दिए जाएंगे ट्रैक्टर और हल।
5. दो लाख परिवारों को कृषि संबंधी उपकरण खरीदने के लिए तीन हजार रुपये की सहायता।
6. बेरोजगार और बेसहारा महिलाओं को प्रतिवर्ष दी जाएगी 10 हजार रुपये की मदद।
7. 20 लाख बीपीएल परिवारों के लिए दवायुक्त ( मेडिकेटेड ) मच्छरदानी।
8. 10 लाख बीपीएल परिवारों को दो – दो सीएफएल बल्ब दिए जाएंगे।
9. राज्य की हर महिला को मिलेगा जीवन ज्योति योजना का लाभ।
पश्चिम बंगाल : लेफ्ट ने यहां सत्ता में 33 साल पूरे कर लिए हैं , लेकिन आगामी चुनाव उसके लिए सबसे बड़ी चुनौती है। ममता बनर्जी लेफ्ट को उसी के मूल मुद्दों पर घेरने में जुटी हैं। बुद्धदेव भी घोषणाएं करने में पीछे नहीं हैं -
1. ओबीसी रिजर्वेशन 7 फीसदी से बढ़ाकर 17 फीसदी किया। मकसद पिछड़े मुसलमानों को फायदा पहुंचाना।
2. मुर्शिदाबाद में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के सेंटर की स्थापना के लिए 30 एकड़ जमीन दी।
3. सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण की योजना।
4. उत्तर और दक्षिण 24 परगना में छात्राओं को बांटी गईं 47 हजार साइकलें।
5. उत्तर बंगाल में आदिवासी छात्राओं के लिए 14 हजार साइकलों का वितरण।
6. 8 हजार अंशकालिक कॉलेज टीचरों के वेतन में 35 फीसदी की बढ़ोतरी।
7. सरकारी दफ्तरों में तैनात अस्थायी कर्मचारियों को स्थायी किया गया।
8. पार्टी कैडर से लिए गए और संविदा पर काम कर रहे 1500 टीचरों को रेग्युलर किया गया।

Posted on Mar 14th, 2011
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Posted in :  राजनीति     
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