भारतीय सांसदों की कीमत लगी…!

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विकिलीक्स ने एक और सनसनीखेज खुलासा करते हुए यूपीए सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। विकिलीक्स पर जारी अमेरिकी दूतावास के एक केबल में कहा गया है कि 2008 में भारत-अमेरिका न्यूक्लियर डील पर घिरी सरकार ने विश्वास मत हासिल करने के लिए सांसदों की खरीद-फरोख्त की थी। केबल के मुताबिक, चौधरी अजित सिंह की पार्टी आरएलडी के सांसदों को 10-10 करोड़ रुपये दिए गए थे।

विकिलीक्स के ताजा खुलासे के बाद मुख्य विपक्षी पार्टी बीजेपी और लेफ्ट पार्टियों ने संसद में इस मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगा है। इन पार्टियों ने कहा है कि प्रधानमंत्री को खुद इस मामले में सफाई देनी चाहिए। विकिलीक्स के खुलासे के बाद शिवसेना ने कहा है कि उसके सांसदों को भी यूपीए सरकार के ‘ मैनेजरों ‘ ने ऐसा ही ऑफर दिया था। पार्टी के नेता संजय राउत ने कहा कि हमारे सांसद पार्टी के प्रति वफादार हैं, इसलिए उन्होंने ऑफर ठुकरा दिया था।

केबल के अनुसार, जब विश्वास मत पर वोटिंग में सिर्फ 5 दिन रह गए थे तो कांग्रेस के नेता सतीश शर्मा के सहायक नचिकेता कपूर वोटिंग में कुछ सांसदों को अपने पक्ष में करने के लिए भारी फंड की व्यवस्था में लगे थे। सतीश शर्मा को गांधी परिवार का करीबी माना जाता है। सतीश शर्मा ने यूएस डिप्लोमैट स्टीवन वाइट से कहा था कि उनकी पार्टी न्यूक्लियर डील के लिए जी-तोड़ प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा था कि वह और पार्टी के दूसरे नेता 22 जुलाई को विश्वास मत में सरकार की जीत के लिए ‘काम’ कर रहे हैं।

शर्मा ने कहा था कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और दूसरे लोग अमेरिकी फाइनैंशर संत चटवाल के जरिए अकाली दल के 8 वोट अपने पाले में लाने की कोशिश कर रहे थे, पर सफल नहीं हुए। शर्मा के मुताबकि, मनमोहन सिंह, सोनिया गांधी और राहुल गांधी न्यूक्लियर डील के पक्ष में हैं और उन्होंने पार्टी के सभी नेताओं से यह बात स्पष्ट कर दी है। गांधी परिवार के करीबी नेता ने यह भी कहा था कि बीजेपी में फूट डालने के लिए उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी के दामाद रंजन भट्टाचार्य को बीजेपी सांसदों से बात करने को कहा था।

नचिकेता ने कहा था कि फंड की समस्या नहीं है, चिंता इस बात की है कि वोट सही दिशा में पड़े। अमेरिकी दूतावास के एक कर्मचारी ने उनके पास दो पेटी कैश भी देखे थे, जिसमें करीब 50 से 60 करोड़ रुपये थे। विकिलीक्स के अनुसार, नचिकेता ने अमेरिकी दूतावास के कर्मचारी को बताया कि अजित सिंह की पार्टी आरएलडी के चार सांसदों को सराकार को सपोर्ट करने के लिए 10-10 करोड़ रुपये दिए गए हैं।

वहीं अजित सिंह ने इस बात का खंडन किया है। उन्होंने विकिलीक्स के खुलासे को गलत ठहराते हुए कहा कि हमारे पास तीन सांसद थे, जबकि विकिलीक्स के अनुसार हमारी पार्टी के चार सांसदों को पैसे मिले। उन्होंने कहा कि हम शुरू से ही डील के खिलाफ थे, पक्ष में वोट करने का सवाल ही नहीं उठता।

अमेरिकी दूतावास ने आकलन किया था इन ‘कोशिशों’ के बावजूद विश्वास मत में सरकार को मुश्किल से बढ़त मिलेगी। अमेरिकी दूतावास ने उस समय भेजे संदेश में कहा था,’सबसे अच्छी स्थिति में भी सरकार मामूली वोटों से ही जीतेगी। 273 वोट विश्वास मत के पक्ष में, 251 विपक्ष में पड़ेंगे और 19 अनुपस्थित रहेंगे।

आश्चर्यजनक है कि अमेरिकी दूतावास का यह आकलन काफी हद तक सही रहा था। विश्वास मत के पक्ष में 275 और विपक्ष में 256 वोट पड़े थे, वही 10 सांसद अनुपस्थित रहे थे।

Posted on Mar 17th, 2011
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Posted in :  बड़ी खबर     
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