सुप्रीमकोर्ट रखैल ना कहने की याचिका खारिज

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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने एक गैरसरकारी सामाजिक संगठन की उस अपील को खारिज कर दिया है जिसमे सुप्रीम कोर्ट से अपनी टिप्पणीयों और फैसलों में महिलाओं का अपमान करने  वाले शब्दों को हटा देने की मांग की गई थी।

गौरतलब है कि दिसंबर 2010 में महिला दक्षता समिति ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी अपील में कोर्ट से ‘कीप’ (रखैल), ‘वन नाइट स्टैंड’ (एक रात के सेक्स संबंध, बिना जिम्मेदारी के  (कैजुअल सेक्स संबंध) और ‘सर्वेंट’ (नौकरानी, या सेक्स गुलाम) जैसे शब्दों को टिप्पणियों से हटाने की मांग की थी। संगठन की दलील थी कि इस तरह के शब्द महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक हैं।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों में प्रयोग किए गए कुछ शब्दों पर महिला संगठनों ने इससे पहले भी आपत्ति जताई थी। इन टिप्पणियों में से इन शब्दों को हटाने के लिए पुर्नविचार याचिका  दायर की गई थी जिसे बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया।

इससे पहले लिव-इन रिश्तों संबंधी सुप्रीम कोर्ट के फैसले में ‘रखैल’ या ‘वन नाइट स्टैंड’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर अतिरिक्त सॉलीसिटर जनरल (एएसजी) इंदिरा जयसिंह ने कड़ी

आपत्ति जताई थी। उन्होंने इन शब्दों को फैसले में से निकाले जाने पर भी जोर दिया था।

इन शब्दों से खफा इंदिरा जयसिंह ने जस्टिस मरकडेय काटजू तथा टीएस ठाकुर की बेंच से कहा था कि फैसले में ‘कीप यानी रखैल’ शब्द बेहद आपत्तिजनक है। इसे निकाले जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा था कि देश का सुप्रीम कोर्ट 21वीं सदी में किसी महिला के खिलाफ यह शब्द कैसे इस्तेमाल कर सकता है? क्या एक महिला कह सकती है कि उसने एक पुरुष को रख रखा है।

क्या कहा था कोर्ट ने

सुप्रीम कोर्ट ने लिव इन रिलेशनशिप के एक मामले में फैसला सुनाते कहा था कि किसी महिला को पत्नी का दर्जा महज इसलिए नहीं मिल सकता कि वह रखैल के तौर पर किसी पुरूष

के साथ रही हो, या पुरूष ने उसे सिर्फ शारीरिक संबंधों की पूर्ति के लिए नौकर की तरह रखा हो।

कोर्ट ने कहा कि महज इन शर्तो पर ही कोई महिला घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत हर्जाने का दावा नहीं कर सकती । इसके लिए उसे समाज के सामने खुद को पत्नी साबित करना

Posted on Mar 17th, 2011
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Posted in :  ब्रेकिंग न्यूज     
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