मुश्किल हुआ टीम इंडिया का सफर

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5 मैच में 3 जीत,एक टाई और एक हार। ये है वर्ल्डकप 2011 में टीम इंडिया का अब तक का सफर। लेकिन ये सफर सुनहरा कम और सवालों से भरा ज़्यादा है। छोटी टीमों के खिलाफ भी जीत लड़खड़ाकर नसीब हुई है, ऐसे में दक्षिण अफ्रीका से मिली ताजा हार के बाद वेस्‍टइंडीज के खिलाफ होने वाले मुकाबले से पहले चिंताएं बढ़ गई हैं। खास कर तब जब गुरुवार को वेस्‍ट इंडीज की टीम इंग्‍लैंड से मामूली अंतर से हारी हो।

टीम इंडिया की चिंता की वजहें और भी हैं। कप्‍तान महेंद्र सिंह धोनी बुखार के चलते गुरुवार को नेट प्रैक्टिस में हिस्‍सा नहीं ले सके। बुधवार को उन्‍होंने प्रैक्टिस नहीं की थी, जबकि वेस्‍ट इंडीज के खिलाड़ी लगातार अभ्‍यास कर रहे हैं। 20 मार्च को अगर वेस्‍ट इंडीज ने भारत को हरा दिया तो टीम इंडिया का इस विश्‍व कप में सफर वहीं थम जाएगा।यदि आंकड़ों पर गौर करें तो टीम इंडिया से एक बार उम्‍मीदें बंधती हैं लेकिन जहां तक खिलाडियों के प्रदर्शन की बात है तो इससे चिंता बढ़ जाती है।

बांग्‍लादेश के खिलाफ पहले मैच को छोड़ दिया जाए तो मास्‍टर ब्‍लास्‍टर सचिन तेंडुलकर और वीरेंद्र सहवाग अब तक भारतीय बल्‍लेबाजी को ठोस शुरुआत देते आए हैं जिसमें सचिन दुर्भाग्‍यपूर्ण तरीके से रन आउट हो गए थे। इन दोनों सलामी बल्‍लेबाजों ने हर बार ठीक ठाक रन बनाएं और टीम को बड़ा स्‍कोर खड़ा करने में काफी मदद की है। सहवाग 65.40 की औसत से 327 रन बनाकर टूर्नामेंट के ‘टॉप स्‍कोरर’ रहे हैं जबकि तेंडुलकर 64.80 की औसत के साथ इनसे महज तीन रन पीछे हैं।

हालांकि ये दोनों खिलाड़ी आयरलैंड और नीदरलैंड्स के खिलाफ मैचों में बाद में बल्‍लेबाजी करते हुए टीम के लिए धुआंधार रन नहीं बटोर सके जिससे इन दोनों टीमों के खिलाफ कम स्‍कोर के बावजूद उन्‍हें बुरी तरह रौंद देने की टीम की काबिलियत पर सवाल उठने लगे हैं।इन मैचों में युवराज ने टीम की लाज रखी और पांच मैचों में ऑल राउंड प्रदर्शन करते हुए 171 रन जोड़ने के साथ सात विकेट भी अपनी झोली में डाले। इसमें एक मैच में युवराज ने पांच विकेट लिए तो कुल पांच मैचों में तीन अर्धशतक भी जड़ डाले। आयरलैंड और नीदरलैंड्स के खिलाफ मैच में युवराज के प्रदर्शन के बूते टीम इंडिया में नई जान दिखी। गौतम गंभीर भी एक और ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्‍होंने अच्‍छी शुरुआत तो दी लेकिन इसे बड़े स्‍कोर में तब्‍दील नहीं कर सके। अब तक के पांच मैचों में उन्‍होंने 197 रन बनाए हैं लेकिन अभी तक एक भी नाबाद पारी नहीं खेली।

बांग्‍लादेश के खिलाफ शुरुआती मुकाबले में नाबाद शतक बनाने के बावजूद युवा खिलाड़ी विराट कोहली बाकी चार मैचों में महज 55 रनों का ही योगदान कर सके हैं। उनका प्रदर्शन इस तरह का नहीं रहा कि युसूफ पठान को उनकी जगह पर टॉप आर्डर में रखा जा सके और यही टीम इंडिया की सबसे बड़ी समस्‍या है।यदि टीम इंडिया अगले मुकाबले के लिए बल्‍लेबाजी क्रम में फेरबदल करना चाहेगी तो इसका कोई मायने नहीं रह जाता। युसूफ को टॉप आर्डर में जगह देने का न तो उन्‍हें कोई फायदा हुआ और न ही टीम को। उन्‍होंने पांच मैचों में 63 रन जोड़े। इसमें सर्वाधिक स्‍कोर 30 का रहा। उनकी बल्‍लेबाजी भी कुछ खास नहीं रही। पांच मैचों में उन्‍होंने 28 ओवर गेंदबाजी की और 139 रन देकर केवल एक विकेट हासिल कर सके।

कप्‍तान महेंद्र सिंह धोनी का फार्म भी संतोषजनक नहीं है। उन्‍होंने पांच मैचों में महज 96 रन जोडे़ हैं। हालांकि दो नाबाद पारियों की बदौलत उनका औसत 48 का जरूर हो गया है लेकिन अपने ‘हेलीकॉप्‍टर शॉट’ के लिए मशहूर माही अपने फार्म में नहीं हैं। उनका विकेटकीपिंग शानदार रहा है जबकि बैटिंग बेहद निराशाजनक रहा है। बल्‍लेबाजी के मोर्चे पर टीम इंडिया की कमजोरी साफ दिखती है। जहीर खान को छोड़कर कोई भी गेंदबाज उम्‍मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सका है। जहीर ने पांच मैचों में 4.31 की औसत से 12 विकेट झटकाए हैं। हरभजन ने भी दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मैच में तीन विकेट लिए तो पांच मैचों में उनके कुल पांच विकेट हुए। ऐसे में उनसे भी स्पिन आक्रमण की अगुवाई ज्‍यादा उत्‍साहजनक नहीं है। हालांकि उन्‍होंने काफी कंजूसी भरी (4.41 की औसत से) गेंदबाजी की है।

मुनाफ पटेल ने चार मैचों में नौ विकेट लिए लेकिन उनका औसत बढिया नहीं रहा और एक ओवर में करीब छह रन लुटाए। पीयूष चावला तीन मैचों में अभी तक चार विकेट ही ले सके हैं और उनका औसत भी 6.21 रहा है। उनका प्रदर्शन आशीष नेहरा से थोड़ा बेहतर कहा जा सकता है जिन्‍होंने दो मैचों में 6.36 की औसत से एक विकेट लिए हैं। इन सब के बीच आश्‍चर्य इस बात पर होता है कि धोनी ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मैच में आखिरी अहम ओवर में आशीष नेहरा को गेंद क्‍यों थमा दी जबकि हरभजन का एक ओवर बचा था।श्रीसंथ को अभी तक एक मैच में मौका मिल सका है जबकि आर अश्विन को एक ‘सरप्राइज वीपन’ के तौर इस्‍तेमाल किया जा सकता है। इन दोनों गेंदबाजों को इस मैच में मौका दिए जाने की जरूरत है।

Posted on Mar 18th, 2011
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Posted in :  खेल्र     
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