बढ़ी सांसद निधि पर कैग को ऐतराज ..

Font Size : अ- | अ+ comment-imageComment print-imagePrint

सांसदों को क्षेत्र विकास के लिए मिलने वाली सांसद निधि के इस्तेमाल के तौर तरीकों से भारत का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक [कैग] संतुष्ट नहीं है। संसद में पेश अपनी रिपोर्ट में कैग ने न सिर्फ सांसद निधि से चलाई जाने वाली परियोजनाओं के ठेके देने के तरीकों पर सवाल खड़े किए हैं बल्कि इसके लिए होने वाले भुगतान में भी गड़बड़ियां पाई हैं।

सांसद निधि के इस्तेमाल में होने वाले घपलों को उजागर कर कैग की रिपोर्ट ने इसे दो करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने के फैसले पर भी प्रश्न चिन्ह लगा दिया है। वित्त मंत्री ने सांसद निधि की राशि बढ़ाने का एलान करते वक्त ही संकेत कर दिया था कि कैग ने इसमें गड़बड़ियां पाई हैं। रिपोर्ट पर वित्त मंत्री ने चिंता जतायी थी और लोक लेखा समिति के अध्यक्ष डॉ. मुरली मनोहर जोशी से सांसद निधि के इस्तेमाल पर सुझाव देने को कहा था।

कैग की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक पिछले पांच साल में एक बार भी सांसद निधि की पूरी राशि का इस्तेमाल नहीं हो पाया। 2004-05 से लेकर 2008-09 के बीच इसका आधा या उससे कुछ अधिक ही इस्तेमाल हो पाया है। इसके अलावा कैग ने पाया है कि इस निधि से होने वाले काम के आवंटन में भी सांसदों का हस्तक्षेप काफी अधिक है। कैग के मुताबिक सांसद अपनी पसंद के ठेकेदारों को काम देने के लिए स्थानीय प्रशासन पर दबाव डालते हैं।

अपनी रिपोर्ट में कैग ने सांसद निधि के इस्तेमाल को लेकर पूरी निगरानी व्यवस्था कायम करने की सिफारिश की है। कैग का कहना है कि कार्यक्रम व क्रियान्वयन मंत्रालय को प्रत्येक सांसद का अलग-अलग लेखा-जोखा रखना चाहिए जिसमें जारी होने वाली सांसद निधि से लेकर उसके इस्तेमाल और सांसदों की सिफारिशों तक का ब्यौरा हो। कैग ने सांसद निधि से कराये जाने वाले कामों में फर्जी वाउचरों और फर्जी कामगारों को भुगतान के मामले भी पकड़े हैं।

Posted on Mar 19th, 2011
SocialTwist Tell-a-Friend
Posted in :  न्याय और प्रशाशन     
Subscribe by Email

Leave a comment

Type Comments in Indian languages (Press Ctrl+g to toggle between English and Hindi OR just Click on the letter)


विदेश

राज्य

महिला

अपराध

ब्यूटी