विश्वास मत का सर्वाधिक फायदा पीएम को:सुषमा स्वराज

Font Size : अ- | अ+ comment-imageComment print-imagePrint

विश्वास मत के लिए रिश्वत के आरोपों पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के संसद में दिए बयान पर असंतोष जताते हुए भाजपा ने कहा कि विश्वास मत का सबसे अधिक लाभ प्रधानमंत्री को मिला। पार्टी ने सवाल किया कि 14वीं लोकसभा द्वारा नियुक्त समिति की सिफारिशों के बावजूद सरकार ने मामले की जाच सीबीआई से क्यों नहीं कराई?

लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज और राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने प्रधानमंत्री के संसद में वक्तव्य के बाद संयुक्त संवाददाता सम्म्ेलन में कहा कि भले ही आप कह रहे हैं कि आप [मनमोहन] अपराधी नहीं हैं लेकिन विश्वास मत की सफलता में हुए अपराध के आप भी लाभार्थी हैं।

उन्होंने कहा कि मामले की जाच के लिए गठित संसदीय समिति ने माना था कि रिश्वतखोरी हुई है और मामले की आगे जाच किसी उचित एजेंसी से कराने की सिफारिश की थी। सरकार ने इतने दिनों तक सचाई छिपाने की कोशिश की और जाच नहीं कराई।

उन्होंने संसद में बयान देने से पहले इंडिया टुडे कान्क्लेव में प्रधानमंत्री द्वारा इस संबंध में वक्तव्य दिए जाने को संसद की अवमानना करार दिया। प्रधानमंत्री के बयान पर स्पष्टीकरण की अनुमति नहीं दिए जाने पर असंतोष जताते हुए सुषमा ने संवाददाताओं से कहा कि लोकसभा में कई प्रसंग आए हैं जब असामान्य परिस्थिति में सदस्यों को प्रश्न पूछने दिए गए। हमें लिखित नोटिस देने पर भी अनुमति नहीं दी गई।

सुषमा ने कहा कि आज लोकसभा और राज्यसभा में जिस तरह सदस्यों को स्पष्टीकरण का मौका नहीं दिया गया, उससे लगता है कि सरकार ने पहले से ही मन बना रखा था कि प्रधानमंत्री पढ़ा हुआ बयान देंगे और इस पर विपक्ष को सवाल जवाब का मौका नहीं दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि हमने लोकसभा अध्यक्ष को नियम 193 के तहत चर्चा कराने के लिए नोटिस दिया है और हम चाहते हैं कि 22 मार्च को संसद के दोनों सदनों में इस विषय पर चर्चा की अनुमति दी जाए।

उन्होंने कहा कि राजनयिक केबल को प्रधानमंत्री ने अटकलबाजी कहा है लेकिन यह किसी राजनयिक की सामान्य चर्चा नहीं बल्कि उसके द्वारा घटना का वर्णन है और परमाणु करार पर अनिश्चितता की स्थिति में अमेरिका में संदेह की स्थिति को दबाने के लिए पैसे दिखाकर वाशिगटन को यह संदेश भेजा गया कि सरकार गिरेगी नहीं और उसे बचाने की पूरी तैयारी है।

सुषमा ने कहा कि प्रधानमंत्री ने आज अपने बचाव में पूरी तरह बेतुका तर्क दिया कि 2008 के बाद आम चुनाव हो चुके हैं और उसमें संप्रग फिर से जीत गई। उन्होंने कहा कि यह बयान राजनीति में अपराधीकरण को नया आयाम देता है। इस बयान का तो यह अर्थ हुआ कि अपराधी अगर चुनाव जीत जाए तो दोषी साबित होने पर भी उस पर मुकदमा नहीं चलेगा।

Posted on Mar 19th, 2011
SocialTwist Tell-a-Friend
Posted in :  राजनीति     
Subscribe by Email

Leave a comment

Type Comments in Indian languages (Press Ctrl+g to toggle between English and Hindi OR just Click on the letter)


विदेश

राज्य

महिला

अपराध

ब्यूटी