यूपी में गरीबों को मुंह चिढ़ा रहीं योजनाएं

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उत्तर प्रदेश /वित्तीय वर्ष समाप्त होने में कुछ ही दिन शेष हैं। इस तरह राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य बीमा योजना दो साल में भी उस स्तर पर पहुंचती नहीं दिख रही जब गरीबों को निशुल्क स्वास्थ्य सेवा पाने की उम्मीद हो। इस साल भी योजना का क्रियान्वयन फ्लाप ही साबित हुआ है। गरीबों के सर्वे और वंचितों को स्मार्ट कार्ड देने जैसे प्रयास पूरे होना तो दूर शुरू भी न हो सके।

सरकार की गरीब तबके के लिए स्वास्थ्य बीमा योजना 2009 में ही लॉच की गयी। इसके बाद बीपीएल कार्ड धारकों को योजना के अन्तर्गत उन्हें लाभान्वित करने की दिशा में वर्ष 2010 तक प्रथम प्रयास इतना रहा कि जिले में 25 हजार 200 स्मार्ट कार्ड प्राइवेट एजेन्सी ने तैयार कर गरीबों को थमा दिए, लेकिन बीमा योजना से लाभान्वित होने के लिए न सरकारी अस्पतालों में ही व्यवस्था हुई और न ही अनुबन्ध पर लिए गए प्राइवेट नर्सिग होमों ने उन्हें सुविधा दी।

ऐसे में अपात्रों को भी स्मार्ट कार्ड जारी किए जाने जैसी शिकायतों के बीच योजना थम गई। योजना में ग्राम्य विकास विभाग और स्वास्थ्य विभाग दोनों को सहभागी बनाया गया था। इस कारण स्वास्थ्य विभाग और ग्राम्य विकास विभाग के मध्य सिर्फ पत्र व्यवहार तो होता रहा, लेकिन स्मार्ट कार्ड का लाभ किसी गरीब को नहीं मिला।

ठप योजना 2010 के अन्तिम पड़ाव तक यूं ही पड़ी रही, तो इस बीच पुन: जिला प्रशासन ने योजना क्रियान्वयन के लिए खाका तैयार किया। उसके अन्तर्गत पुन: सर्वे कराने तथा वंचित पात्रों को स्मार्ट कार्ड दिलाए जाने के अलावा अपात्रों के स्मार्ट कार्ड निरस्त करने का निर्णय खुद जिलाधिकारी की मौजूदगी में लिया गया।

स्वास्थ्य विभाग को योजना क्रियान्वयन के लिए सरकारी और प्राइवेट संस्थाओं की सूची तैयार करने को कहा गया। सर्वे के कार्य को लेकर शिक्षकों और पंचायतीराज विभाग के कर्मचारियों को जुटाने के लिए उनसे सूचियां मांग ली गईं। इसके बाद तीन माह भी यूं ही गुजर गए और योजना एक इंच भी आगे नहीं बढ़ सकी है।

उधर योजना को लेकर सम्बन्धित पटल प्रभारी पी. पी. सिंह का कहना है कि अभी जिन कर्मचारियों से पुन: सर्वे कराया जाना है उन्हीं की सूची प्राप्त नहीं हुई है।

Posted on Mar 23rd, 2011
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Posted in :  राज्य     
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