मनमोहनसिंह बोले मैंने नहीं ख़रीदे वोट..?

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प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बुधवार को दोहराया कि न तो सरकार और न ही कांग्रेस की ओर से 2008 में विश्वास प्रस्ताव के दौरान सांसदों के वोट खरीदे गए।

वह लोकसभा में विकिलीक्स के खुलासे पर विपक्षी दलों के हमलों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा , ‘ कई सांसदों ने पहले भी आरोप लगाए हैं। विपक्ष की मांग पर मैंने 18 मार्च को भी सदन में बयान दिया था। मैं उसे एक बार फिर दोहराता हूं। ‘

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उन्होंने कहा , ‘ भारत सरकार के लिए यह सम्भव नहीं है कि वह अमेरिकी सरकार और भारत में उसके दूतावास के बीच बातचीत के लिए इस्तेमाल केबल की विषय वस्तु का सत्यापन करे। केबल में जिन लोगों के नाम हैं , उनमें से बहुत ने भी इनकी सत्यता से इंकार किया है। ‘

उन्होंने विपक्ष के इन आरोपों से इंकार किया कि 18 मार्च को अपने बयान से उन्होंने सदन को गुमराह करने की कोशिश की और जुलाई 2008 के नोट के बदले वोट मामले की जांच करने वाली एक संसदीय समिति ने अपने निष्कर्ष में सरकार बचाने के लिए सांसदों को रिश्वत देने तथा इस मामले की आगे भी जांच करने की जरूरत बताई थी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने नोट के बदले वोट मामले में जांच समिति की रिपोर्ट पर तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी के बयान को ही दोहराया।

प्रधानमंत्री के मुताबिक , ‘ मैंने अपने बयान में वही कहा जो चटर्जी ने 16 दिसम्बर , 2008 को जांच समिति की रिपोर्ट सदन के पटल पर रखते हुए कहा था। मैंने रिपोर्ट पढ़ी है और मेरी समझ से इसमें रिश्वत के आरोपों को साबित नहीं किया जा सका। ‘

प्रधानमंत्री ने इससे पहले अपने बयान में कहा था कि मामले की जांच कर रही संसदीय समिति के पास कोई ठोस सबूत नहीं है।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि किसी भी दूतावास के लिए भारत में संघर्ष की स्थिति पैदा करना बहुत आसान है। बस कुछ संदेशों को नियोजित करने और यह सुनिश्चत करने की जरूरत है कि इस रहस्य का खुलासा किया गया है।

उन्होंने दूतावासों के तथाकथित संदेशों पर भरोसे को ‘ खतरनाक ‘ बताया। प्रधानमंत्री ने हालांकि किसी दूतावास का नाम नहीं लिया , लेकिन उनका इशारा अमेरिकी राजनयिक संदेश का खुलासा करने वाली वेबसाइट विकिलीक्स की तरफ था , जिसके मुताबिक विश्वास प्रस्ताव में जीत के लिए कांग्रेस की ओर से सांसदों को रिश्वत दी गई।

बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी पर निशाना साधते हुए वह पीएम बनना अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझते थे, लेकिन 2004 के लोकसभा चुनावों में हार का सामना करने के बाद आडवाणी ने उन्हें ‘ माफ ‘ नहीं किया है।

Posted on Mar 23rd, 2011
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Posted in :  बड़ी खबर     
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