सुषमा ने मनमोहन को लताड़ा,कहा गद्दी छोड़े

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नई दिल्ली।। ‘ नोट के बदले वोट ‘ मामले में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर सीधा निशाना साधते हुए विपक्ष ने उनसे पूछा कि अगर इस लेनदेन में उनकी पार्टी या सरकार का कोई व्यक्ति शामिल नहीं था तो आखिर यह करतूत किसकी थी।

प्रधानमंत्री के 18 मार्च को संसद में दिए गए बयान पर नियम-193 के तहत लोकसभा में चर्चा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने इसकी जांच सीबीआई से कराने और जिन नए लोगों के भी नाम इसमें आए हैं, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री इधर-उधर की बात न करते हुए यह बताएं कि वह यदि कुछ जानते ही नहीं हैं तो आखिर किस मजबूरी की वजह से प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठे हुए हैं।

सुषमा ने कहा, ‘ प्रधानमंत्री ने सबूतों को नाकाफी बताते हुए आरोपों को खारिज कर दिया था। लेकिन सत्य से आंखें नहीं मूंदी जा सकतीं। प्रधानमंत्री जी, सत्य को देखिए और पहचानिए। ‘ उन्होंने कहा, ‘ सामान्यत: जो गोपनीय संदेश भेजे जाते हैं वे दो श्रेणी के होते हैं। पहली किसी से बातचीत के आधार पर और दूसरी घटनाओं के आधार पर। जो खुलासा विकिलीक्स ने किया है वह घटनाओं पर भेजे गए संदेश पर आधारित हैं। ‘

विपक्ष की नेता ने कहा,’दूसरों पर दोष मढ़ना प्रधानमंत्री की आदत बन गई है। उन्हें दूसरों को बलि का बकरा बनाने के बजाय सरकार का मुखिया होने के नाते खुद भी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। यदि महंगाई होती है तो कृषि मंत्री शरद पवार जिम्मेदार हैं, 2-जी घोटाला है तो ए. राजा जिम्मेदार हैं और यदि कॉमनवेल्थ गेम्स हैं तो सुरेश कलमाड़ी दोषी हैं।’

सुषमा ने प्रधानमंत्री के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए एक मशहूर शेर पढ़ा ‘तू इधर-उधर की न बात कर, ये बता कि कारवां क्यों लुटा, मुझे रहजनों से गिला नहीं, तेरी रहबरी ( नेतृत्व) का सवाल है।’

सुषमा ने कहा, ‘ इस खुलासे ने हमारे उस आरोप को बल दिया है, जिसे हमने विश्वास मत के दौरान सबूतों के साथ संसद में पेश किया था। ‘ उन्होंने कहा, ‘ प्रधानमंत्री ने अपने बयान में कहा था कि नोट के बदले वोट मामले की जांच के लिए गठित की गई किशोरचंद्र देव समिति ने भी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि किसी तरह की रिश्वत नहीं दी गई , जबकि रिपोर्ट में कहीं भी इस बात का जिक्र नहीं है। बल्कि इसमें रिश्वत दिए जाने की बात कही गई है। ‘

रिपोर्ट के कुछ अंश पढ़ते हुए सुषमा ने कहा कि समिति ने इस मामले की जांच किसी एजेंसी से कराने की सिफारिश की है और इसके लिए उसने कहा है कि इसकी आगे जांच की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, ‘ इस मामले की जांच अभी जारी है , लेकिन प्रधानमंत्री को इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई। इसकी जांच कछुए की चाल से चल रही है। तीन साल हो गए। सिर्फ एक रिपोर्ट आई है जिसमें कहा गया है संबंधित टेप के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है। ‘

विपक्ष की नेता ने कहा, ‘ मैं प्रधानमंत्री से आग्रह करती हूं कि वह इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपें। साथ ही इसमें उन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाए जिनके नाम ताजा खुलासे में सामने आए हैं। ‘

सीपीआई के गुरुदास दासगुप्ता ने मौजूदा यूपीए सरकार को देश के इतिहास का भ्रष्टतम शासन करार देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने अपने बयान में कुछ अहम पहलुओं का जवाब जानबूझ कर नहीं दिया। दासगुप्ता ने कहा कि भ्रष्टाचार की खुलती परतों ने देश की लोकतांत्रिक प्रणाली को प्रदूषित कर दिया है। उन्होंने कहा कि कॉमनवेल्थ गेम्स और स्पेक्ट्रम आवंटन से संबंधित घोटालों व काले धन के व्यापक प्रवाह की घटनाओं से लज्जित देश को विकिलीक्स के खुलासे ने पूरी दुनिया में और अधिक शर्मसार कर दिया है।

उन्होंने कहा कि सांसदों को रिश्वत देने के मामले की जांच शीर्ष एजेंसियों से नहीं कराया जाना संदेह पैदा करता है। इतने बड़े मामले की जांच दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा को सौंपना सरकार की नीयत पर संदेह पैदा करता है।

Posted on Mar 23rd, 2011
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Posted in :  बड़ी खबर     
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