20 साल बाद पुरुषों से 20 कम होंगी महिलाएं

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गुड़गांव के पांच डॉक्टरों को कन्या भ्रूण हत्या के मामले में सजा सुनाई गई है। उन्हें 3 साल जेल में गुजारने होंगे। एक्सपर्ट्स की मानें, तो यह सजा कम है, क्योंकि महिलाओं का अनुपात तेजी से कम होता जा रहा है। पिछले दिनों आई एक स्टडी की मानें, तो 20 साल बाद भारत में 120 पुरुषों के अनुपात में सिर्फ 100 महिलाएं उपलब्ध होंगी।

अपने बेटे के लिए खूबसूरत दुलहन लाने का सपना हर मां-बाप की आंखों में होता है। लेकिन जब उन्हें पता लगता है कि उनके अपने घर बेटी आने वाली है, तो वे अबॉर्शन का सहारा लेकर उस अजन्मी बच्ची को दुनिया में आने से पहले ही मौत के घाट उतार देते हैं।

हाल ही में आई एक स्टडी में बताया गया है कि भारत में लड़के का क्रेज इतना ज्यादा बढ़ गया है कि आने वाले दो दशकों में देश में लड़कियों के मुकाबले लड़कों की संख्या 20 फीसदी ज्यादा हो जाएगी। यानी कि हर 100 में से 20 लड़कों को कुंवारा ही रहना होगा।

गौरतलब है कि इस स्टडी को यूसीएल सेंटर फॉर इंटरनैशनल हेल्थ ऐंड डिवेलपमेंट लंदन के डॉक्टर थेरेस हेसकेथ ने अंजाम दिया है। स्टडी में कहा गया है कि गर्भ में बच्चे का सेक्स जानकर अबॉर्शन कराने की आसान सुविधाओं के चलते भारत, चीन और साउथ कोरिया में मेल-फीमेल रेश्यो गड़बड़ा गया है।

यहां यह जानना भी जरूरी है कि इससे पहले आई स्टडीज में भी इस बात का खुलासा हुआ है कि भारत में कन्या भ्रूण हत्या की वजह से सालाना 5-7 लाख लड़कियां और रोजाना 2 हजार लड़कियां जन्म से पहले ही मौत के घाट उतारी जा रही हैं। जिन फैमिलीज में पहले से ही बेटी है, उनमें दूसरी बेटी आने की संभावना 54 फीसदी कम होती है। जबकि जिन फैमिलीज में पहले से दो बेटियां हैं, वहां तीसरी बेटी के जन्म की संभावना 20 फीसदी कम होती है।

दूसरी ओर, माना जाता है कि दुनिया भर में आमतौर पर 105 पुरुषों पर 100 महिलाएं पैदा होती हैं। इस रेश्यो को सेक्स रेश्यो ऐट बर्थ (एसआरबी) कहा जाता है। स्टडी में बताया गया है कि भारत में अलग-अलग रीजन में यह रेश्यो अलग-अलग है। स्टडी की मानें, तो नॉर्थ और वेस्ट इंडिया के कुछ स्टेट्स मसलन पंजाब, दिल्ली और गुजरात में सेक्स रेश्यो 125 के खतरनाक लेवल तक पहुंच गया है, जबकि साउथ और ईस्ट इंडिया के स्टेट्स केरल और आंध्र प्रदेश में यह रेश्यो 105 है।

हेसकेथ के अनुसार, भारत में तेजी से घटते सेक्स रेश्यो के लिए कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ बने कानूनों का कड़ाई से पालन नहीं हो पाना है। स्टडी में बताया गया है कि भारत में करीब 34 हजार रजिस्टर्ड अल्ट्रासाउंड क्लिनिक हैं, जबकि अवैध क्लिनिक्स का कोई लेखा-जोखा नहीं है। बकौल डॉ. हेसकेथ, ‘सिर्फ साउथ कोरिया में ही कन्या भू्रण हत्या के खिलाफ कड़ाई से कानून का पालन किया जा रहा है। जबकि भारत और चीन में अल्ट्रासाउंड से मादा भ्रूण का पता लगाकर अबॉर्शन कराना बेहद आसान है। सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि यह सब बड़े-बड़े हॉस्पिटल्स में क्वॉलिफाइड डॉक्टर्स द्वारा किया जा रहा है। जाहिर है, यह सब सरकार की नाकामी को बयां करता है।’

यह एक कॉमन ट्रेंड है कि अगर किसी के पहला या दूसरा बच्चा बेटी है , तो पैरंट्स चाहते हैं कि दूसरा या तीसरा बच्चा बेटा ही हो। स्टडी में बताया गया है कि अगर किसी कपल का पहला या दूसरा बच्चा लड़की है , तो भारत में दूसरे बच्चे के जन्म के वक्त एसआरबी 132 और तीसरे बच्चे के वक्त 139 होता है। जबकि पहला या दूसरा बच्चा लड़का होने की कंडिशन में एसआरबी आश्चर्यजनक रूप से नॉर्मल होता है। जाहिर है , ये आंकड़े सीधे तौर पर पहला या दूसरा बच्चा लड़की होने की स्थिति में दूसरे या तीसरे बच्चे के रूप में लड़के की चाहत को बयां करते हैं।

Posted on Mar 23rd, 2011
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Posted in :  समाज और हम     
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