हसन अली के सीए और बिहार के एक नेता के घर छापामारी

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देश के सबसे बड़े ‘टैक्स चोर’ हसन अली की काली कमाई का पता लगाने के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार को देश के कई शहरों में छापामारी की। पुणे में हसन के सीए सुनील शिंदे के घर-दफ्तर पर छापामारी हुई। ईडी ने बिहार के एक नेता के घर पर भी छापा मारा है। हसन अली ने ईडी के अधिकारियों को बताया है कि उसके अकाउंट में जमा करीब 36 हजार करोड़ रुपए में से बड़ा हिस्सा देश के कई बड़े नेताओं और नौकरशाहों का है। अली ने ये पैसे स्विस बैंक और दूसरे बैंकों के अकाउंट्स में जमा करवाए थे। इन बड़े नेताओं में महाराष्‍ट्र के तीन पूर्व मुख्यमंत्री भी शामिल हैं। हवाला कारोबारी हसन अली के खिलाफ सबूत देने का ऐलान करने वाले पुलिस उपायुक्त अशोक देशभ्रतार को निलंबित करने का मामला गरमाता जा रहा है। इस बीच राज्य के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों के हसन अली से कथित तौर पर संबंध होने की बात उछलने से प्रकरण में नया मोड़ आ गया है। दूसरी ओर सरकार का दावा है कि देशभ्रतार के खिलाफ की गई कार्रवाई सीआईडी जांच रिपोर्ट पर आधारित है। लेकिन विपक्ष ने इसे देशभ्रतार के खिलाफ सरकार की साजिश बताया है। विपक्ष के नेता एकनाथ खड़से ने आरोप लगाया कि अली से राज्य के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों से संबंध हैं। देशभ्रतार के खिलाफ कार्रवाई भी इसलिए की गई, क्योंकि उन्होंने अली के विरोध में सुप्रीम कोर्ट में जाने का फैसला किया था। सरकार को डर है कि इससे राज्य के उन सभी वरिष्ठ नेताओं और नौकरशाहों के नाम सामने आ सकते हैं, जिनका काला पैसा अली ने देश से बाहर पहुंचाया था। मंगलवार को विधानसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्तावों पर चर्चा के बाद इस मुद्दे पर सरकार और विपक्षी सदस्यों के बीच बहस हो गई। हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित की गई। विधानसभा अध्यक्ष दिलीप वलसे पाटील ने पहली बार दस मिनट के लिए, तो दूसरी बार उपाध्यक्ष वसंत पुरके ने आधे घंटे के लिए कामकाज स्थगित किया। इस बीच गृहमंत्री आरआर पाटील ने भाजपा के देवेंद्र फडणवीस को चुनौती दी कि अगर वे आरोप साबित कर देंगे, तो वह मंत्रीपद और सार्वजनिक जीवन छोड़ देंगे। लेकिन अगर साबित नहीं कर सके, तो उन्हें विधायक पद से इस्तीफा देना होगा। श्री फडणवीस ने भी उनकी चुनौती कबूल कर ली। इससे पहले गृहमंत्री ने देशभ्रतार के खिलाफ कार्रवाई के

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बारे में सफाई देते हुए उन्हें दोषी ठहराया। श्री पाटील ने बताया कि सीडी प्रकरण में देशभ्रतार के खिलाफ सीआईडी जांच चल रही थी। सीआईडी ने अपनी रिपोर्ट में देशभ्रतार को गंभीर गुनाह का दोषी पाया है। उनके खिलाफ सीडी से छेड़छाड़ और उसके जरिए गृहमंत्री और सरकार को बदनाम करने का आरोप साबित हुआ है। इस कारण देशभ्रतार को सरकारी नौकरी से बर्खास्त करके उनके विरुद्ध आपराधिक मुकदमा चलाने की सिफारिश की गई है। श्री देशभ्रतार पर बिल्डर यूसुफ लकड़ावाला से एक करोड़ का हफ्ता मांगने का भी आरोप है। गृहमंत्री ने अनुसार सीडी के आधार पर पिछले वर्ष बजट अधिवेशन में आरोप लगाया गया था कि मुंबई के होटल सेंटोर में तत्कालीन मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख, तत्कालीन गृहमंत्री (आरआर पाटील), वरिष्ठ कांग्रेसी नेता अहमद पटेल और हसन अली के बीच एक गुप्त बैठक हुई थी, जिसमें वरिष्ठ आईपीएस अफसर हसन गफूर की मुंबई पुलिस आयुक्त पद पर नियुक्ति का फैसला किया गया। श्री पाटील ने बताया कि सीडी की जांच में उससे छेड़छाड़ के सबूत मिले हैं। सीडी से यह भी साफ हुआ है कि उसकी रिकॉर्डिग खुद देशभ्रतार ने की थी। लेकिन इसकी जानकारी उन्होंने महकमे से छिपाई और बाद में सीडी की प्रतियां खबरिया चैनलों को बांटी। फर्जी पासपोर्ट मामले में अली को 15 दिसंबर से 23 दिसंबर, 2008 के बीच गिरफ्तार किया गया था। इस दौरान देशभ्रतार ने करीब पांच बार उससे अलग-अलग ठिकानों पर पूछताछ की, मगर उससे मिली जानकारी जांच अधिकारी को नहीं दी। श्री पाटील ने सवाल उठाया कि अगर देशभ्रतार की नीयत साफ थी, तो उसने फर्जी पासपोर्ट संबंधी सवालों की बजाय पुलिस आयुक्त पद पर नियुक्ति के बारे में ही अली से सवाल क्यों पूछे। गृहमंत्री के मुताबिक सबूतों के आधार पर सीआईडी ने 6 जनवरी, 2011 को अपनी अंतिम रिपोर्ट में देशभ्रतार के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की सिफारिश की थी। इसके बावजूद सरकार ने सीधे कार्रवाई न करते हुए पहले देशभ्रतार का पक्ष सुनने का फैसला किया है और तब तक उनका निलंबन किया है। देशभ्रतार का पक्ष सुनने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस पर श्री फडणवीस ने दलील दी कि सीडी प्रकरण को बीच में लाकर गृहमंत्री मुद्दे को टालने की कोशिश कर रहे हैं। देशभ्रतार ने 15 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में अली के खिलाफ सबूत देने की सरकार से अनुमति मांगी और 19 मार्च को सरकार ने उन्हें निलंबित किया है। सीआईडी रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करने के लिए इससे पहले उन्हें किसने रोक रखा। यदि देशभ्रतार ने एक करोड़ रुपए का हफ्ता मांगा था, तो उनके सीआर (गोपनीय रिपोर्ट) में इसका उल्लेख क्यों नहीं है। यह आरोप सच हैं तो 15 मार्च, 2011 को गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने देशभ्रतार की पदोन्नति मंजूर कैसे की। श्री फडणवीस ने अली, श्री गफूर और दिल्ली के एक नेता (अहमद पटेल) के फोन रिकार्ड की पड़ताल की मांग उठाई। उन्होंने बताया कि अली के खिलाफ उपलब्ध सारे सबूतों के वे जाने-माने वकील राम जेठमलानी के मार्फत सुप्रीम कोर्ट में पेश करेंगे। 6 साल में कमाया 54 हजार करोड़ पुणो के घुड़दौड़ कारोबारी का धन 6 सालों में सौ गुना बढ़ गया। कैग से मंगलवार को संसद में अपनी रिपोर्ट में बताया कि हसनअली खान की आय 2001-02 में 528.9 करोड़ थी, महज 6 साल में इसकी संपत्ति की उड़ान सौ गुना से भी अधिक हो गई, जो 54,268 .6 करोड़ रुपए तक पहुंच गई। हजारों करोड़ कमाने के बावजूद इसने अभी तक रिटर्न फाइल नहीं की है, कोई भी टैक्स नहीं दिया है। हसन अली ने ईडी के अधिकारियों को बताया कि उसके खाते में जमा 36 हजार करोड़ रुपए में से एक बड़ा हिस्सा देश के कई बड़े नेताओं और नौकरशाहों का है। जांच एजेंसी के मुताबिक हसन अली ने हवाला के जरिए राजनेताओं की काली कमाई विदेश भेजी। अली ने यह राशि स्विस बैंक और दूसरे बैंकों के खातों में जमा करवाई थी। बाद में इसी पैसे को भारत लाकर नेताओं की ओर से बताए गए नामों से शेयर बाजार में लगाया। 5 साल पहले पड़ा था छापा हसन अली का नाम पहली बार सुर्खियों में पांच साल पहले तब आया जब आयकर विभाग ने पुणो में कोरेगांव पार्क स्थित उसके घर पर छापा मारा। गुप्तचर एजेंसियां हसन अली पर एक अर्से से नजर गड़ाए बैठी थीं। एक टेलीफोन वार्ता गुप्तचर एजेंसियों ने टेप की थी, जिसमें हसन अली यूनियन बैंक ऑफ स्विट्जरलैंड के अपने पोर्टफोलियो मैनेजर से बात कर रहा था। उस पोर्टफोलियो मैनेजर से जितनी बड़ी रकम की ट्रांसफर की बात सुनी गई, उससे टेलीफोन सुनने वाले चकरा गए। टेलीफोन वार्ता को गुप्तचर एजेंसियों की मानीटरिंग एजेंसी को सौंपा गया। अधिकारियों की समझ में नहीं आ रहा था कि हसन अली पर हाथ डाला कैसे जाए? निर्णय किया गया कि आयकर विभाग हसन अली के घर छापा मारेगा। आयकर अधिकारी जब हसन अली के घर पर छापा मारने पहुंचे तो एक मध्यमवर्गीय परिवार के मकान में 8.04 बिलियन डॉलर (करीब 38 हजार करोड़ रुपए) यूनियन बैंक ऑफ स्विट्जरलैंड (यूबीएस बैंक) में जमा होने के दस्तावेज मिले। आयकर विभाग के इस छापे के बाद पहली बार हसन अली का नाम सुर्खियों में आया। ईडी को मिल सकती है राहत इस खुलासे से बाद जांच में कोर्ट की फटकार झेल रही ईडी को राहत मिल सकती है। जांचकर्ताओं ने अली से मिली जानकारी के बाद यूबीएस, बारक्लेज और क्रेडिट स्विस बैंकों के भारतीय प्रतिनिधियों को नोटिस भेजा है जिससे उनसे पूछताछ के बाद खातों के बारे में और जानकारी जुटाई जा सके।

Posted on Mar 23rd, 2011
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Posted in :  न्याय और प्रशाशन     
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