जमीन घोटले मामले में येद्दियुरप्पा को राहत

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बेंगलूर। घोटाले के आरोपों से घिरे कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी एस येद्दियुरप्पा और उनके परिवारवालों को हाईकोर्ट से एक और राहत मिली है। हाईकोर्ट ने स्थानीय अदालत के उस फैसले पर शुक्रवार को अंतरिम स्थगनादेश दिया जिसमें उनके खिलाफ निजी शिकायत पर संज्ञान लिया गया था। अदालत ने 23वीं अतिरिक्त सिविल और सत्र न्यायाधीश सी बी हिप्पारगी के उस आदेश पर रोक लगा दी जिसे उन्होंने शहर के दो वकीलों द्वारा दायर पाच शिकायतों को संज्ञान में लिया था।

दोनों वकीलों सिराजिन बाशा और के एन बलराज ने येद्दियुरप्पा और अन्य के खिलाफ भ्रष्टाचार और भाई भतीजावाद करने का आरोप लगाया था। मुख्यमंत्री के दामाद सोहन कुमार की चार शिकायतों के संबंध में दायर चार याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश के एन केशवनारायण ने रोक लगाने का फैसला दिया। सोहन कुमार ने स्थानीय अदालत के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

अदालत ने इसके साथ ही दोनों वकीलों सिराजिन बाशा और के एन बलराज को भी नोटिस जारी किया। गौरतलब है कि 29 मार्च को हाईकोर्ट ने पहली शिकायत की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी। उस शिकायत पर सुनवाई करते हुए स्थानीय अदालत ने 24 मार्च को लोकायुक्त जाच का आदेश दिया था।

हाईकोर्ट के चारों मामलों पर दिए गए हालिया स्थगनादेश के साथ ही पाचों शिकायतों पर अगली तारीख तक के लिए सत्र न्यायालय में इन मामलों की सुनवाई पर रोक लग गई है। राज्यपाल हंसराज भारद्वाज के अनुमति दिए जाने के बाद दोनों वकीलों ने विशेष लोकायुक्त अदालत के समक्ष जनवरी में पाच शिकायतें दर्ज कराकर येद्दियुरप्पा और अन्य के खिलाफ मामला चलाने की माग की थी।

स्थानीय अदालत ने दूसरी शिकायत पर सबूतों की रिकार्डिंग का काम पूरा कर लिया है और बाकी के तीन मामलों पर यह काम किया जाना बाकी है।

गौरतलब है कि येद्दियुरप्पा और अन्य के खिलाफ जमीन गैर अधिसूचित करने के मामले में कथित तौर पर अनियमितता बरतने का आरोप है।

इस बीच एक अन्य मामले में अदालत के स्थगन आदेश के बाद कर्नाटक के गृहमंत्री आर अशोक को पाच अप्रैल तक के लिए राहत मिल गई है। उनके खिलाफ एक निजी शिकायत पर संज्ञान लिया गया है।

न्यायाधीश केशवनारायण ने अशोक द्वारा दायर की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए यह स्थगन आदेश दिया।

उन पर बेंगलूर विकास प्राधिकरण से भूमि को अवैध तरीके से गैर अधिसूचित कराने का आरोप है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल ने उनके खिलाफ मामला चलाने की अनुमति देने से इंकार कर दिया था।

अशोक की तरफ से पैरवी कर रहे वरिष्ठ वकील बी वी आचार्य ने कहा कि स्थानीय अदालत ने लोकसेवक के खिलाफ शिकायत पर बगैर अनुमति के ही संज्ञान लिया था।

न्यायाधीश के एन केशवनारायण ने सभी मामलों की सुनवाई पर आगामी पंाच अप्रैल तक के लिए रोक लगा दी। याचिका पर अब पाच अप्रैल को बहस होगी।

Posted on Apr 2nd, 2011
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Posted in :  ब्रेकिंग न्यूज, राज्य     
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