चपरासी बनाता था फर्जी पायलट

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फ्लाइंग क्लब का एक पूर्व चपरासी साढ़े सात लाख रुपये में परीक्षा पास न करने के बावजूद युवकों को कॉमर्शियल पायलट लाइसेंस (सीपीएल) दिलवा रहा था। मध्य प्रदेश, गुजरात के फ्लाइंग क्लबों में काम कर चुके चपरासी का धंधा चल निकला तो नौकरी छोड़कर वह यही काम करने लगा।

फर्जी दस्तावेजों पर पायलट लाइसेंस मामले की जांच कर रही क्राइम ब्रांच ने एकनाथ पाटिल (46) नामक इस पूर्व चपरासी को कैप्टन हिरेन नामक पायलट के साथ गिरफ्तार किया है। अभिषेक कौशिक नामक फर्जी पायलट को पहले ही पकड़ा जा चुका है। इस प्रकार इस मामले में डीजीसीए के सहायक निदेशक समेत अब तक 13 फर्जी पायलट को पकड़ा गया है। चार फर्जी पायलट फरार हैं।

क्राइम ब्रांच उपायुक्त अशोक चांद के अनुसार इस बार मामला कॉमर्शियल पायलट लाइसेंस का है। फ्लाइंग क्लब में ट्रेनिंग लेने के दौरान कॉमर्शियल पायलट लाइसेंस के लिए होने वाली पांच परीक्षाएं पास न कर पाने के बावजूद फर्जी दस्तावेजों से लाइसेंस हासिल करने वाले अभिषेक कौशिक (25) को पकड़ा गया। गुड़गांव निवासी अभिषेक से पूछताछ हुई तो सामने आया कि अहमदाबाद निवासी हिरेन नागर ने एकनाथ पाटिल नामक युवक की मदद से साढ़े सात लाख रुपये में उसे लाइसेंस मुहैया कराया था।

इस आधार पर कैप्टन हिरेन नागर तथा एकनाथ पाटिल को गिरफ्तार किया गया।अभिषेक कौशिक व हिरने की जान पहचान मध्य प्रदेश के एक फ्लाइंग क्लब में हुई थी। दोनों वहां ट्रेनिंग ले रहे थे। हिरेन ने बताया कि साढ़े सात लाख रुपये देने पर वह उसे मार्कशीट व लाइसेंस उपलब्ध करा देगा। नवंबर माह में अभिषेक को डीजीसीए से सीपीएल भी मिल गया। दोनों लोग अभी किसी एयरलाइंस को अपनी सेवाएं नहीं दे रहे थे।

जांच में पाया गया कि एकनाथ पाटिल पहले इंदौर के फ्लाइंग क्लब में चपरासी की नौकरी करता था। इसके बाद उसने फ्लाइंग सुपरवाइजर के तौर पर एक फ्लाइंग इंस्टीट्यूट में इंदौर में नौकरी शुरू की। बाद में वह गुजरात के एक फ्लाइंग स्कूल में फ्लाइंग सुपरवाइजर बन गया।

Posted on Apr 6th, 2011
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Posted in :  अपराध, ब्रेकिंग न्यूज     
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