सुप्रीम कोर्ट ने पवार को फटकार लगाई

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गौरतलब है कि पिछले सप्ताह उच्चतम न्यायालय ने सरकार से भंडारण समस्या से निपटने के लिए गरीबों को मुफ्त अनाज बांटे जाने को कहा था। एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने कहा था, अनाज सड़ रहे हैं, अल्पकालिक उपायों के तहत इसे आप मुफ्त में बांटिए। अनाजों की खरीद और वितरण की नोडल एजेंसी भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के पास इस महीने की शुरुआत में 5.78 करोड़ टन का भंडार था जबकि बफर मानदंडों के तहत 3.19 करोड़ टन का भंडार होना चाहिए।
गरीबों को मुफ्त अनाज बांटने के लिए दिए गए अदालती आदेश पर केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार की टिप्पणी के लिए सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें फटकार लगाई है। कोर्ट ने सरकारी गोदामों में अनाज को सड़ाने के बजाय उसे गरीबों को मुफ्त बांटने के अपने आदेश पर शरद पवार के बयान को काटते हुए कहा कि उसने इसका आदेश दिया था, न कि सुझाव जैसा कि कृषि मंत्री बताना चाहते हैं।
मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस दलवीर भंडारी और जस्टिस दीपक वर्मा की बेंच ने मंगलवार को अडिशनल सॉलीसिटर जनरल मोहन पारशरन से कहा, ‘अपने मंत्री से कहिए कि इस तरह की टिप्पणी न करें। हमने जो कहा वह आदेश है, सुझाव नहीं।’ कोर्ट ने यह भी कहा कि सरकार को अनाज की हिफाजत के लिए अनिवार्य रूप से कदम उठाना चाहिए ताकि यह सड़ने न पाए। बेंच ने यह भी कहा कि सरकार को उतने ही आनाज की खरीद करनी चाहिए, जितने की वह हिफाजत कर सके।
सुप्रीम कोर्ट ने 12 अगस्त को अपने आदेश में कहा था कि केंद्र सरकार भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के गोदामों में सड़ रहे अनाज को गरीब लोगों में मुफ्त बांट दे। जस्टिस दलवीर भंडारी और जस्टिस दीपक वर्मा की बेंच ने अडिशनल सॉलीसिटर जनरल मोहन पारशरन से कहा था, ‘इसे बर्बाद होने देने के बजाय आप इसे गरीब लोगों में बांट दें।’ कोर्ट के आदेश को पवार ने महज सुझाव करार देते हुए कहा था कि ऐसा करना संभव नहीं है।
कोर्ट ने यह भी कहा था कि सरकार यह सुनिश्चित करे कि प्रत्येक राज्य में बड़े गोदाम बनाने के बजाय जिलों में गोदाम बनाए जाएं और सार्वजनिक वितरण प्रणाली(पीडीएस) की प्रक्रिया को कम्प्यूटरीकृत किया जाए। कोर्ट ने यह आदेश नागरिक अधिकार संगठन पीयूसीएल की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया था।

Posted on Sep 28th, 2010
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