अन्ना के आगे सरकार के पसीने छूटे

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भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना हजारे के चक्रवात से डरी सरकार शुक्रवार को पंजों के बल खड़ी रही। अन्ना का अनशन तुड़वाने के लिए सरकार और कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने सारे घोड़े खोल दिए। दस जनपथ से लेकर सात रेसकोर्स और रायसीना हिल्स यानी राष्ट्रपति भवन तक बैठकों के दौर चलते रहे।

पांच राज्यों के चुनावों पर असर पड़ने का भय संविधान और कानूनी तर्को पर भारी पड़ा। शुरुआत में सरकार की तरफ से मांगों को असंवैधानिक और गैरवाजिब बताया गया, लेकिन अन्ना के समर्थन में बढ़ते जनसैलाब में डूबने के डर ने सरकार को कानून और नियमों के फंदे में ढील देने पर मजबूर कर दिया।

लोकपाल विधेयक का प्रारूप बनाने के लिए आंदोलनकारियों की ज्यादातर शर्तो पर सरकार झुकी, लेकिन ड्राफ्ट कमेटी का अध्यक्ष और इसकी अधिसूचना के मसले पर गतिरोध बना रहा। अन्ना भी अपनी जगह पर कायम रहे तो सरकार ने टीम अन्ना को तर्को के साथ कुछ तेवर भी दिखाए।

इसके बाद कुछ सकारात्मक दिशा में बात तो बनी, लेकिन पूरी तरह से भरोसे का माहौल नहीं बन सका है। जंतर-मंतर से शुरू हुई क्रांति को विकराल रूप देने से पहले ही शांत करने की कोशिश के तहत शुक्रवार सुबह पीएम आवास पर सोनिया, प्रणब, अहमद पटेल और अन्ना से बातचीत कर रहे कपिल सिब्बल व पीएम के प्रमुख सचिव टीकेए नायर की वार्ता हुई। प्रधानमंत्री इस मुद्दे पर राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल से भी विमर्श करने पहुंचे।

सूत्रों के मुताबिक, समय सीमा के अंदर लोकपाल बिल बनाने, ड्राफ्ट कमेटी में पांच सदस्य सिविल सोसाइटी और पांच सदस्य सरकार के तथा अगले संसद सत्र में इसे लागू करने पर सहमति बन चुकी थी। बस दो मुद्दों पर गाड़ी फंसी। पहला ड्राफ्ट कमेटी का अध्यक्ष बनाने और अधिसूचना जारी करने पर।

इस दौरान आंदोलनकारियों से ट्रैक टू वार्ता भी चली, मगर टीम अन्ना अधिसूचना के बजाय ड्राफ्ट कमेटी के शासनादेश भर से राजी हो गई। हालांकि ड्राफ्ट कमेटी के दो अध्यक्ष एक सरकार और सह अध्यक्ष जनता की तरफ से बनाने पर सहमति बन गई, लेकिन शासनादेश का मामला फंसा रहा।

इसी क्रम में प्रधानमंत्री से सिब्बल, खुर्शीद और मोइली की तीन बार मुलाकातें हुई। शाम को टीम अन्ना से बात कर उन्हें फार्मूला सौंपा गया, जिससे आंदोलनकारी संतुष्ट दिखे।

Posted on Apr 9th, 2011
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Posted in :  बड़ी खबर     
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