आडवाणी ने क्या किया ..: प्रणब

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लालकृष्ण आडवाणी की उस टिप्पणी जिसमें उन्होंने सरकार को लोकपाल विधेयक का विरोधी बताया था, पर जवाबी हमला बोलते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने रविवार को कहा कि जब राजग सरकार सत्ता में थी तो वे कौन से कारण थे जिनकी वजह से वह इसे अधिनियम बनाने में सफल नहीं हो पाई।

वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि यदि विपक्ष सहयोग करता है तो संप्रग संसद के अगले सत्र में लोकपाल विधेयक पेश करने और उसे पारित करने को तैयार है। मुखर्जी ने कहा, आडवाणी ने क्या किया? जब वह राजग सरकार सत्ता में थी और वह देश के गृहमंत्री थे तो लोकपाल बिल पास होने से क्यों रुका रहा?

आडवाणी की इस मांग पर कि लोकपाल विधेयक संसद के अगले सत्र में पेश और पारित होना चाहिए, मुखर्जी ने कहा, यदि विपक्ष इसके लिए सहयोग करता है तो हमें इसे पारित करने में प्रसन्नता होगी। कांग्रेस नेता ने कहा, मैं वास्तव में इस सुझाव का स्वागत करता हूं। भाजपा मुख्य विपक्षी दल है।

यदि वह (आडवाणी) अपने सदस्यों को राजी कर लेते हैं तो हमें इसे बिना स्थायी समिति के पास भेजे पारित करने में खुशी होगी, लेकिन किसी मंच से घोषणा करने के बदले वह यह सुनिश्चित करें कि लोकसभा और राज्यसभा में उनके सदस्य हमारे साथ सहयोग करें।

केंद्र सरकार को स्वतंत्र भारत की सबसे भ्रष्ट सरकार की उपाधि देने वाले आडवाणी को निशाने पर लेते हुए प्रणब ने कहा कि भाजपा की अगुआई वाले राजग वर्ष 1998 से 2004 तक जब केंद्र में सत्ता में था तब उसने लोकपाल विधेयक को कानून बनाने के लिए क्या किया।

लोकपाल मसौदा तैयार करने वाली समिति में पिता-पुत्र वकील शांति भूषण व प्रशांत भूषण को नामित किए जाने पर योग गुरु बाबा रामदेव द्वारा की गई आलोचना पर प्रणब ने कहा कि ये नाम समाजसेवी अन्ना हजारे ने स्वयं सुझाए थे। उन्होंने कहा, लोकपाल बिल का अभियान चलाने वालों और सरकार के बीच हुए समझौते में यह तय हुआ था कि मसौदा समिति में जनता और सरकार के प्रतिनिधियों का 50:50 अनुपात होना चाहिए।

Posted on Apr 11th, 2011
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Posted in :  राजनीति     
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