भारत में तीन करोड़ गरीब बढ़ेंगे :एडीबी

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खाने – पीने की चीजों की बढ़ती कीमतें आम आदमी का जीना दुश्वार कर रही है। एशियन डिवेलपमेंट बैंक ( एडीबी ) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार , मौजूदा समय में खाद्य वस्तुओं की कीमत में 10 पर्सेंट की बढ़ोतरी हुई है।

इससे एशियाई देशों में करीब 6.4 करोड़ और लोग ‘ बेहद गरीब ‘ के दायरे में आ सकते हैं। इनमें 3 करोड़ भारतीय हैं।

दूसरे शब्दों में कहें तो इतने लोग बढ़ती महंगाई के कारण गरीबी रेखा से नीचे ( बीपीएल ) श्रेणी आ सकते हैं। इनमें करीब 50 पर्सेंट भारतीय हैं। रोजाना 1.25 डॉलर यानी 56 रुपये से कम कमाने वालों को बीपीएल कैटिगरी में माना जाता है।

योजना आयोग के ताजा अनुमानित आंकड़ों के अनुसार , 2009-10 में भारत में गरीबी रेखा से नीचे जीने वालों की संख्या कुल आबादी का करीब 32 पर्सेंट रही। 2004-05 में यह कुल आबादी का 37.2 पर्सेंट थी। एडीबी की रिपोर्ट को मानें तो अब इसमें 3 करोड़ लोग और जुड़ सकते हैं।

फूड प्राइस इनफ्लेशन ऐंड डिवेलपिंग एशिया हेडलाइन से जारी एडीबी की रिपोर्ट में कहा गया है कि घरेलू खाद्य वस्तुओं की कीमत में 10 पर्सेंट बढ़ोतरी से 3.3 अरब की आबादी वाले एशियाई महाद्वीप के करीब 6.4 करोड़ अतिरिक्त लोग गरीबी रेखा के नीचे आ सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक , खाद्य वस्तुओं की कीमतों में औसतन 10 पर्सेंट की बढ़ोतरी से भारत के गांवों में रहने वाले 2.30 करोड़ और शहरों में रहने वाले 66 लाख लोगों का जीवन स्तर गरीबी रेखा से नीचे जा रहा है। जहां इनकी आमदनी कम हुई है , वहीं खाद्य वस्तुओं की कीमतें बढ़ने से ये उनकी पहुंच से बाहर हो गई हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर खाद्य वस्तुओं में कीमतों में तेजी आगे भी जारी रही और खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर 20 पर्सेंट पहुंची तो भारत में गरीबी की चपेट में 5.82 करोड़ अतिरिक्त लोग आ जाएंगे। इनमें 4.56 करोड़ ग्रामीण होंगे और 1.36 करोड़ शहरी होंगे।

एडीबी के मुख्य इकॉनमिस्ट चैंगयोंग री का कहना है कि विकासशील देशों में वैसे तो गरीब परिवार अपनी आमदनी का 60 पर्सेंट हिस्सा खाने – पीने पर खर्च करते हैं लेकिन खाद्य वस्तुओं की कीमतें बढ़ने से उनकी स्थिति और बिगड़ रही है। इससे स्वास्थ्य और बच्चों की शिक्षा पर खर्च करने की उनकी क्षमता घट रही है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि कच्चे तेल की कीमत 31 महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई है। इसका सीधा असर खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर पड़ रहा है। अब एशियाई देशों की आर्थिक विकास दर पर इसका नेगेटिव होगा। ऐसा हुआ तो गरीबों की तादाद और बढ़ेगी। 2011 की शुरूआत में वैश्विक खाद्य वस्तुओं की कीमत जिस तरह बढ़ी , वह अगर जारी रही तो एशियाई देशों की आर्थिक विकास दर 1.5 पर्सेंट तक घट सकती है।

रिपोर्ट के मुताबिक , बढ़ती महंगाई का एक कारण कृषि उत्पादन घटना और डिमांड बढ़ना है। मगर इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि खाद्यान्न बाजार में सट्टेबाजी हावी है। यही कारण है कि एक तरफ तो कीमतें बढ़ रही हैं , किसानों को इसका फायदा नहीं हो रहा है। बिचौलिये माल खा रहे हैं। इसे रोकने की जरूरत है।

Posted on Apr 26th, 2011
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Posted in :  हिंदुस्तान     
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