रेपिस्टो को नपुंसक बनाने की सिफारिश

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अदालत ने कहा है कि यूएस और दूसरे विकसित देशों में रेप के मामलों में केमिकल और सर्जिकल कैस्ट्रैशन (एक तरह का बंध्याकरण) जैसी सजा को विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। खासकर बार-बार रेप करने वालों और बच्चों के खिलाफ किए गए यौन उत्पीड़न के मामलों में ऐसी सजा को विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है।

अदालत ने कहा कि भारत में भी स्थिति काफी गंभीर है, लेकिन अभी तक इस बारे में विचार नहीं किया गया है। अदालत ने सीरियल रेपिस्ट और बच्चों के खिलाफ किए गए ऐसे अपराध के मामले में कैस्ट्रैशन को वैकल्पिक सजा के तौर पर इस्तेमाल किए जाने की जरूरत बताई।

अदालत ने सौतेली बेटी के साथ रेप के मामले में उसके पिता को 10 साल की कैद सुनाते हुए उक्त टिप्पणी की। रोहिणी कोर्ट स्थित अडिशनल सेशन जज कामिनी लॉ ने कहा कि उनकी समझ से समय आ गया है कि सिविल सोसायटी को इस मुद्दे पर खड़ा होना होगा और विकसित देशों की तरह ऐसे मामलों के लिए सर्जिकल और केमिकल कैस्ट्रैशन की सजा के लिए अलग से कानून बनाने के बारे में सोचना चाहिए। केमिकल कैस्ट्रैशन में मेडिसिन के जरिये ऐसे शख्स में सेक्शुअल ऐक्टिविटी को कम किया जाता है। इसके लिए सर्जिकल उपाय भी किए जा सकते हैं। अदालत ने जजमेंट की कॉपी कानून मंत्रालय और राष्ट्रीय महिला आयोग को भेजने का निर्देश दिया है ताकि ये बातें उनके संज्ञान में आ सकें।

मामला स्वरूप नगर थाने का है। पुलिस के मुताबिक, एफआईआर के वक्त पीड़ित लड़की 15 साल की थी। पिता की मौत के बाद उसकी मां ने दूसरी शादी कर ली। लड़की के सौतेले पिता ने उसके साथ कई बार रेप किया। 13 जून 2009 को उसे पड़ोसियों ने पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। अदालत ने आरोपी को रेप का दोषी करार दिया।

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि बच्चों के साथ सेक्शुअल क्राइम हमारे देश का काला सच है। अडिशनल सेशन जज कामिनी लॉ ने कहा कि कई विकसित देशों यूएस, यूके, जर्मनी, इजरायल आदि में रेपिस्ट और ऐसे सीरियल ऑफेंडर (बच्चों के खिलाफ किए गए सेक्शुअल अपराध) के लिए कैस्ट्रैशन (एक तरह का बंध्याकरण) सजा के तौर पर प्रयोग में लाया जा रहा है। यूएस में कई बार आरोपी के तैयार होने पर उन्हें कैस्ट्रैशन की सजा दी जाती है इस आधार पर कैद की सजा कम कर दी जाती है। जर्मनी और इजरायल में स्वेच्छा से केमिकल कैस्ट्रैशन सजा स्वीकार करने पर कैद की सजा कम किए जाने का प्रावधान है। प्ली बार्गेनिंग के केस और नेकचलनी पर छोड़े जाने के मामले में इसे शर्त के तौर पर रखा जाता है।

Posted on May 1st, 2011
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Posted in :  ब्रेकिंग न्यूज     
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