सादिक बाशा डीबी समूह का मोहरा

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पूर्व टेलिकॉम मिनिस्टर ए. राजा का निकट सहयोगी सादिक बाशा अपनी कंपनी ग्रीन हाउस प्रमोटर्स को 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले के अभियुक्त डीबी समूह के शाहिद बलवा और विनोद गोयनका की मर्जी के अनुसार चला रहा था। यह बात केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई ने 2जी मामले की सुनवाई कर रही दिल्ली की अदालत को बताई है।

2 जी की जांच गहराने के बाद ग्रीनहाउस प्रमोटर्स के मैनेजिंग डाइरेक्टर बाशा की चेन्नै में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गई थी। बाशा ने बलवा की सिफारिश पर अपनी कंपनी के करीब 40 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया था।

सीबीआई ने ग्रीन हाउस के कर्मचारियों के बयान दर्ज किए हैं। बाशा की मार्च में चेन्नै में रहस्यमई परिस्थितियों में मौत हो गई थी। सीबीआई ने इस घोटाले के सिलसिले में बाशा से पूछताछ की थी।

बाशा के निजी सहायक एम. केविन अमृतराज ने जांच एजेंसी को बताया इन कर्मचारियों को किसी योजना को आगे बढ़ाने या फिर दोनों कंपनियों के बीच गठजोड़ के लिए हटाया गया था। अमृतराज ने ग्रीन हाउस और डीबी समूह के संबंधों के बारे में पूछे जाने पर कहा, के अंत में ग्रीन हाउस प्रमोटर्स के कई अधिकारियों का साक्षात्कार डीबी रीयल्टी की टीम ने किया था और उनकी सिफारिश पर करीब 42 कर्मचारियों को नौकरी से हटा दिया गया था।

उन्होंने कहा कि डीबी समूह की कंपनी एटर्ना डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड ने 1.25 करोड़ रुपये की राशि ग्रीन हाउस प्रमोटर्स को ट्रांसफर की थी और बाद में यही राशि बाशा की कंपनी ने लौटाई थी। राजा के भतीजे आर पी परमेश कुमार ने सीबीआई को बताया था कि पूर्व दूरसंचार मंत्री की पत्नी परमेश्वरी, उनके भाई एक कालियापेरुमल और एक अन्य भतीजा रामचंदन राग्नेश ग्रीन हाउस प्रमोटर्स के अन्य निदेशक थे।

बाशा ने अमृतराज को नौकरी की पेशकश की थी और वह उनके निजी सहायक बन गए। अमृतराज ने कहा कि बाद में उसका पद कारोबारी सलाहकार का हो गया और उसका काम महत्वपूर्ण ग्राहकों और ग्रीन हाउस प्रमोटर्स के बीच सौदे कराना था।

Posted on May 1st, 2011
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Posted in :  ब्रेकिंग न्यूज     
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