टू जी घोटले के सबूत मिटाने में लगी टेलिकॉम कम्पनियां

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भारत में 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जाच के सिलसिले में भारतीय अधिकारियों के मारीशस आने से पहले घोटाले से जुड़ी कंपनियों के लोग यहा घोटाले से संबंधित लेन देने के सबूतों को मिटाने या उनपर पर्दा डालने के जी तोड़ कोशिश में लग गए हैं। उनकी कोशिश है कि भारतीय  जाँच  अधिकारियों के हाथ ऐसे सूत्र न लग सकें जिससे इस घोटाले में धन के लेन देन का पर्दाफाश हो सके।

इस घोटाले की जाच के दायरे में फंसी कंपनी लूप टेलीकाम के कुछ अधिकारियों ने मारीशस में भारतीय उच्चायुक्त मधुसूदन गणपति से मुकाकात की थी। गणपति ने बाद में विदेश मंत्रालय को बताया कि इस निजी क्षेत्र की दूरसंचार कंपनी के दो अधिकारी उनसे मिले थे। वे भारतीय जाच एजेंसियो सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय की ओर से जाँच में सहयोग के लिए मारीशस को भेजे गए कानूनी अनुरोध-पत्र के विषय में जानना चाहते थे। इन दोनों एजेंसियों का एक संयुक्त दल अगले महीने मारीशस आ रहा है।

यहा भारतीय उच्चायोग और भारतीय बैंकों के सूत्रों ने बताया कि जाँच दल के आने की तारीख नजदीक आने के साथ इस प्रकरण से जुड़ी या इसमें रुचि रखने वाली कंपनियों के लोग सूचनाओं के लिए मंडराने लगे हैं।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने अपना नाम जाहिर न करने की शर्त पर कहा कि इसमें से कुछ तो दूसरों के जरिए मारीशस सरकार के अधिकारियों से संपर्क कर रहे हैं और दबाव डाल रहे हैं कि भारत को उनके बारे में सूचनाएं न दी जाएं।

भारत में वित्त मंत्रालय बार-बार माँग की जा रही है कि मारीशस के साथ 1983 के डीटीएए में संशोधन किया जाए ताकि बैंकिंग लेनदेन और कर संबंधी मामलों की जाच में मारिशस सरकार से सूचनाएं हासिल हो सकें। यह माग इस धारणा के कारण भी है कि बहुत से भारतीय काले धन को फिर भारत में निवेश के लिए मारिशस का रास्ता चुनते हैं। यह धारणा दिन ब दिन मजबूत हो रही है।

मारीशस भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का सबसे बड़ा स्रोत है और वहा 44 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश मारीशस की कंपनियों ने किया है। सुरक्षा एजेंसियों को आशका है कि मारीशस भारत में भूसम्पत्ति और दूरसंचार जैसे क्षेत्र में काली कमाई का के निवेश का आसान रास्ता बन गया है।

मारीशस के बारे में एक धारणा रही है कि यह द्वीप देश भी काले धन की शरणस्थलियों में एक है। विकसित औद्योगिक देशों के पेरिस स्थित मंच-ओईसीडी की एक अध्ययन रपट के अनुसार मारीशस भी उन देशों में जहा की बैंकिंग और कर सूचना व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप नहीं है।

Posted on May 1st, 2011
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Posted in :  भ्रस्टाचार     
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