मुख्यमंत्री दोरजी खांडू नहीं रहे

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अरुणाचल के मुख्यमंत्री दोरजी खांडू के साथ लापता हुए हेलीकॉप्टर को खोजने में हवाई सर्वे और उपग्रह के चित्र नाकाम रहे, लेकिन अप्रशिक्षित और बिना किसी उपकरण के स्थानीय लोगों की टीम ने बुधवार सुबह उसे ढूंढ़ निकाला। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल के पूर्वी क्षेत्र के प्रमुख एमएस भुर्जी ने कहा, हवाई सर्वेक्षण तथा उपग्रह से मिले चित्रों के आधार पर हम सेला दर्रे के दक्षिण-पश्चिम इलाके में अभियान केंद्रित कर रहे थे, लेकिन स्थानीय लोगों ने मलबा सेला के उत्तर-पूर्व में ढूंढ़ निकाला।

उन्होंने कहा कि मलबा न तो किसी सुरक्षा बल और न ही हवाई सर्वेक्षण द्वारा खोजा गया है। इसे स्थानीय लोगों ने ढूंढ़ा है। भुर्जी ने कहा कि इस काम में जुटे स्थानीय लोग प्रशिक्षित नहीं थे और न ही उनके पास कोई ऐसा उपकरण था कि वे खोज से समन्वय कर सकें। दुर्घटनास्थल से शवों को किसी ऐसे स्थान पर ले जाना काफी कठिन काम होगा, जहां से उन्हें हेलीकॉप्टर के जरिए दूसरी जगह ले जाया जा सके। यह घने जंगलों वाला और जोखिमभरा क्षेत्र है।

उन्होंने कहा कि इसका निर्णय दिरांग और ईटानगर में आपदा प्रबंधन टीम को लेना है। लोगों ने मलबा ढूंढ़ लिया है। विशेषज्ञों के अनुसार खांडू जिस हेलीकॉप्टर में थे उसका पंजीकरण पिछले साल जुलाई में हुआ था, लेकिन इसमें एक ही इंजन था, जो दुर्गम क्षेत्र में उड़ान के लिए योग्य नहीं था। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय में एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि एक जून को जारी नए नियमों के अनुसार एकमात्र इंजन वाले हेलीकॉप्टर की उड़ान केवल उन क्षेत्रों में की जानी चाहिए, जहां हेलीकॉप्टर उतारने की सुविधा हो।

उन्होंने बताया, नए नियम यह भी बताते हैं कि एक इंजन वाले हेलीकॉप्टर की उड़ान रात या खराब मौसम में नहीं की जानी चाहिए। अपवाद केवल वहीं हो सकता है, जहां दृश्यता बहुत अधिक और सामान्य से अच्छी हो। अधिकारी ने बताया कि हमारी प्रारंभिक जांच से मालूम होता है कि मौसम एक इंजन वाले हेलीकॉप्टर के परिचालन के लिए मुश्किल से सामान्य था। हमारे अधिकारी इसकी जांच करेंगे। हालांकि राज्य सरकार को भी कुछ जवाब देने होंगे।

ईटानगर में एक अधिकारी हेग खोड़ा ने फोन पर बताया कि केवल जांच से ही यह स्पष्ट हो सकता है कि एक इंजन वाला हेलीकॉप्टर क्यों इस्तेमाल किया गया। इस हेलीकॉप्टर को पिछले साल 21 जुलाई को पांच साल के लिए उड़ान की योग्यता का प्रमाण-पत्र मिला था। वर्ष 1991-94 तक नागरिक उड्डयन महानिदेशालय में उड़ान सुरक्षा निरीक्षण विभाग के प्रमुख रह चुके एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) देनजिल कलोर ने कहा कि एक इंजन वाले हेलीकॉप्टर को किसी भी परिस्थिति में नहीं ले जाना चाहिए था।

वहीं पवनहंस के अधिकारी ने कहा कि उन्होंने हेलीकॉप्टर अरुणाचल प्रदेश सरकार को पट्टे पर दिया था, न कि मुख्यमंत्री की यात्रा के लिए। उनके लिए दो इंजन वाला ग्लोबल वेक्ट्रा हेलीकॉप्टर दिया गया था, लेकिन किस हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल वह करें, यह उनका फैसला था।

Posted on May 5th, 2011
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Posted in :  बड़ी खबर     
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