पेट्रोल, डीजल के दाम फिर बढ़ेंग

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इस महीने की 10 तारीख को पश्चिम बंगाल में अंतिम चरण का मतदान होने के बाद ही आम जनता को महंगे पेट्रोल और डीजल का झटका सहना पड़ सकता है। सरकार और तेल कंपनियों के बीच पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तीन-तीन रुपये प्रति लीटर की वृद्धि करने को लेकर विचार-विमर्श हो रहा है।

अंतिम फैसला 11 मई, 2011 को नई दिल्ली में अधिकारप्राप्त मंत्रियों के समूह की बैठक में होगा। सूत्रों के मुताबिक सरकारी तेल कंपनियों का घाटा उस स्तर पर पहुंच गया है, जहां मूल्य वृद्धि का फैसला करना अनिवार्य हो गया है। डीजल की कीमत जून, 2010 के बाद से और पेट्रोल की कीमत जनवरी, 2011 के बाद से नहीं बढ़ी है।

इस बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 108 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। तेल कंपनियों को अभी प्रति लीटर पेट्रोल पर 6.50 रुपये, डीजल पर 14.50 रुपये, केरोसीन पर 25 रुपये और रसोई गैस पर 324 रुपये प्रति सिलेंडर का घाटा हो रहा है। मंगलवार को रिजर्व बैंक के गवर्नर ने भी कहा था कि पेट्रोलियम उत्पादों की खुदरा कीमतें बढ़ाने की जरूरत है।

मालूम हो कि केंद्र सरकार ने चार प्रमुख राज्यों पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव प्रक्रिया शुरू होते ही पेट्रोल मूल्य वृद्धि के विचार को ठंडे बस्ते में डाल दिया था। तभी यह माना गया था कि मूल्य वृद्धि का फैसला चुनाव खत्म होने के बाद होगा। वैसे भी अब राज्यों में अगला चुनाव मई, 2012 से पहले नहीं होना है। इसलिए सरकार पर कोई राजनीतिक दबाव नहीं होगा।

हालांकि दबाव महंगाई दर बढ़ने का होगा। महंगाई की दर आठ फीसदी से ज्यादा बनी हुई है और इसकी वजह से रिजर्व बैंक को ब्याज दरों में लगातार बढ़ोतरी करनी पड़ रही है। पेट्रो मूल्य वृद्धि से महंगाई की दर में और वृद्धि हो सकती है।

Posted on May 5th, 2011
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Posted in :  बड़ी खबर     
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