सुकना घोटाले : रथ धोखाधड़ी के आरोप से बरी

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सुकना भूमि घोटाले के मामले में लेफ्टिनेंट जनरल प्रशांत कुमार रथ को शुक्रवार एक सैन्य अदालत ने धोखाधड़ी के इरादे के आरोप से बरी कर दिया। सैन्य अदालत रथ को पहले बरी किए जाने के फैसले को चुनौती देने वाली पुनरीक्षा याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

ईस्टर्न आर्मी कमांडर ने 2008 के भूमि घोटाले में जनरल कोर्ट मार्शल से रथ को धोखाधड़ी के इरादे के आरोप से बरी किए जाने के फैसले पर पुनर्विचार करने को कहा था। हालांकि जीसीएम ने अपने फैसले को बरकार रखा। सैन्य अदालत के पीठासीन अधिकारी आइजे सिंह ने यहां रथ के दोषी नहीं होने संबंधी फैसला सुनाया।

अभियोजन पक्ष के वकील राघवेंद्र झा ने बताया कि मौजूद साक्ष्यों पर विचार करने के बाद अदालत ने अपने पूर्व के फैसले पर ही मुहर लगाई और कहा कि आरोपी धोखाधड़ी के इरादे का दोषी नहीं है। सैन्य अदालत ने ऐसा कोई नया साक्ष्य नहीं पाया जिसके आधार पर रथ पर धोखाधड़ी की नीयत से काम करने का मामला बनता हो।

पीठासीन अधिकारी ने कहा कि विचार विमर्श के लिए कोई नया विषय नहीं है और पहले के फैसले में हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है। ईस्टर्न आर्मी कमांडर ने रथ के खिलाफ धोखाधड़ी के इरादे के पहले आरोप पर पुनर्विचार के लिए जनरल कोर्ट मार्शल का निर्देश दिया था।

पूर्वी कमान के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल विक्रम सिंह ने इससे पहले दलील दी थी कि अदालत ने मौजूद साक्ष्यों पर विचार करते हुए कुछ पहलुओं को जरूरी महत्व नहीं दिया और इसी आधार पर रथ को धोखाधड़ी के इरादे से काम करने के आरोप से बरी कर दिया।

उन्होंने कहा था कि पहले आरोप के संदर्भ में दोषी नहीं होने का फैसला प्रतिकूल दिखाई देता है। बचाव पक्ष के वकील मेजर एसएस पांडे ने कहा कि कोर्ट ने मूल फैसले में हस्तक्षेप से इनकार किया और पूर्व के निष्कर्षो को सही ठहराया।

पांच लेफ्टिनेंट जनरलों की ज्यूरी ने ढाई घंटे तक मामले में दोनों पक्षों की दलीलों को सुना। जनरल कोर्ट मार्शल की सुनवाई के दौरान रथ अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख सके और रो पड़े। पांडे ने कहा कि हमारे रुख पर कोर्ट ने मुहर लगाई।

उन्होंने पुनरीक्षा के आदेश के पीछे कुछ लोगों का निहित स्वार्थ बताया। सैन्य स्टाफ के पूर्व उप प्रमुख(मनोनीत) रथ 2008 में घोटाले के वक्त 33 कोर के कमांडर थे। जीसीएम ने 22 जनवरी को रथ को उनके पद की वरिष्ठता में दो साल की कमी और 15 साल की पेंशन की कटौती की सजा सुनाई थी।

उस वक्त रथ पर एक निजी रियल इस्टेट कंपनी को सिलीगुड़ी के पास सुकना सैन्य अड्डे से लगे भूखंड पर शैक्षणिक संस्थानों के निर्माण के लिए एनओसी देने से जुड़े तीन मामलों में दोषी ठहराया गया था।

रथ ने पुनरीक्षा याचिका पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया था कि अधिकारी अदालत को अपने हिसाब से फैसला लेने के लिए बाध्य कर रहे हैं। मामले में रथ सात आरोपों का सामना कर रहे थे लेकिन जीसीएम ने 22 जनवरी के अपने पहले फैसले में उन्हें तीन मामलों में ही दोषी पाया था। सैन्य अदालत ने उन्हें प्रक्रियागत अनियमितता, धोखाधड़ी की नीयत से काम करने समेत चार आरोपों से बरी कर दिया था।

हालांकि उन्हें शैक्षणिक संस्थान के निर्माण के लिए गीतांजलि ट्रस्ट के साथ सहमति पत्र पर दस्तखत करने और इस बाबत उच्चाधिकारियों को जानकारी न देने का दोषी पाया गया था।आ‌र्म्ड फोर्स ट्बि्यूनल ने देश की प्रथम महिला सैन्य अधिकारी मेजर डिंपल सिंगला को सेवाकाल के दौरान भ्रष्टाचार के आरोपों से बरी किया था और उन्हें दी गई एक साल की कैद को भी खारिज कर दिया था।

आदर्श और सुकना भूमि घोटालों पर चिंता जताते हुए रक्षा मंत्री एके एंटनी ने अधिकारियों से अधिकतम सतर्कता बरतने को कहा था। उन्होंने भूमि ऑडिट से नियंत्रण प्रणाली को दुरुस्त करने में मदद की उम्मीद जताई।

रक्षा मंत्रालय के पास करीब 17 लाख एकड़ भूमि है। एंटनी ने रक्षा संपदा महानिदेशालय को देश भर में भूमि की स्थिति निर्धारित करने के लिए तुरंत कार्रवाई करने का निर्देश दिया था।

Posted on Jul 17th, 2011
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Posted in :  न्याय और प्रशाशन     
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