हिंदुओं को मिलकर करना पड़ेगा आतंकवाद का सामना : स्वामी

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नई दिल्ली मुंबई में 13 जुलाई को धमाकों के बाद जनता पार्टी के मुखिया सुब्रह्मण्यम स्वामी ने जिहादी आतंकवाद को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया और इससे निपटने के लिए बहुसंख्यक समाज के एकजुट होने की जरूरत पर बल दिया।

एक अंग्रेजी दैनिक में लिखे अपने एक विवादास्पद लेख में स्वामी ने अफगानिस्तान-पाकिस्तान के हालात का जिक्र करते हुए जिहादी आतंकवाद का खतरा बढ़ने की आशंका जताई है। स्वामी के मुताबिक 2012 तक पाक पर तालिबान का कब्जा हो जाएगा और अफगानिस्तान से अमेरिकी सेनाएं हट चुकी होंगी।

इसके बाद भारत को कट्टरपंथियों के बढ़े हुए खतरे का सामना करना होगा, क्योंकि अल कायदा में लादेन का उत्तराधिकारी पहले ही घोषित कर चुका है कि भारत उसका शत्रु नंबर एक है, न कि अमेरिका। स्वामी इस ओर भी इशारा करते हैं कि जिहादी तत्व भारत से इसलिए भी चिढ़े हुए हैं, क्योंकि 800 वर्षो के निरंकुश शासन के बावजूद भारत का इस्लामीकरण नहीं किया जा सका, जबकि शेष देशों का इस्लाम के पहुंचते ही बीस वर्षो के भीतर सौ प्रतिशत इस्लामीकरण हो गया।

स्वामी अपने इस आलेख में हिंदुओं की उदासीनता-कमजोरी को जिहादी आतंक का खतरा बढ़ने का मुख्य कारण मानते हैं। वह चाहते हैं कि इस खतरे के खिलाफ हिंदू समाज एकजुट होकर डटे। स्वामी ने कहा, कुंभ जैसे आयोजनों में तो बिना बुलाए करोड़ों हिंदू पहुंचते हैं, लेकिन कश्मीर, मऊ और मल्लपुरम में जब हिंदुओं पर जुल्म होता है तो वे चुप बैठ जाते हैं।

स्वामी ने कहा कि यदि जाति और भाषा की दीवार को गिरा कर हिंदू एकजुट होकर एक सही हिंदुत्ववादी पार्टी के पक्ष में 50 फीसदी भी मतदान करें तो संसद व विधानसभाओं में उनका दो तिहाई बहुमत होगा। वह हिंदुओं की इस भावना की भी आलोचना करते हुए नजर आते हैं कि वे अपने समुदाय के लोगों के दर्द के प्रति तब तक संवेदनशीलता नहीं दिखाते जब तक वे स्वयं प्रभावित नहीं होते।

स्वामी ने लिखा है-जब कोई हिंदू सिर्फ इसलिए मरता है कि वह एक हिंदू है तो प्रत्येक हिंदू का एक हिस्सा भी मरता है। हमें जिहादी खतरे के खिलाफ हिंदुओं की सामूहिक मनोदशा की जरूरत है। यह विराट हिंदू का एक आवश्यक अंग है।

स्वामी देश में रहने वाले मुस्लिमों से यह अपेक्षा करते हैं कि वे स्वयं को वृहद हिंदू समाज का भाग समझें, क्योंकि उनमें से अधिकांश के पूर्वज हिंदू थे। वह हिंदुओं से व्यक्तिगत और राष्ट्रीय चरित्र की भी अपेक्षा करते हैं।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का उदाहरण देते हुए स्वामी ने लिखा है कि मनमोहन का व्यक्तिगत चरित्र बहुत अच्छा है, लेकिन वह सोनिया गांधी के हाथ की कठपुतली बने हैं। स्वामी का एक सुझाव यह भी है कि हमें आतंकियों की किसी मांग पर झुकना नहीं चाहिए।

1989 (मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबैया सईद का अपहरण कांड) और 1999 (इंडियन एयरलाइंस विमान अपहरण कांड) की घटनाओं का जिक्र करते हुए स्वामी ने कहा है कि हमें आतंकियों को छोड़ने की गलती दोबारा नहीं करनी चाहिए। छोटी से छोटी आतंकी घटनाओं पर भी हमें आतंकियों तथा उनके समर्थकों को कड़ा संदेश देना चाहिए। उदाहरण के लिए जब अयोध्या मंदिर पर आतंकी हमला हुआ था तो हमें इसका जवाब उस स्थल पर मंदिर के निर्माण की शुरुआत कर देना चाहिए था।

Posted on Jul 18th, 2011
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Posted in :  बड़ी खबर     
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1 Response to " हिंदुओं को मिलकर करना पड़ेगा आतंकवाद का सामना : स्वामी "

  1. rahul says:

    एक दम सही बात है अब हिंदुवो को एक होना ही पड़ेगा ….

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