उद्योग घरानों में विरासत के लिये कड़ी मेहनत

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नई दिल्ली, एजेंसी : परंपरा पुरानी है लेकिन समय के साथ इसमें बदलाव आया है। जहां, पहले भारत में उद्योगपतियों को कारोबारी साम्राज्य की कमान बाकी विरासती समान की तरह मिल जाती थी। वहीं, अब इसे पाने के लिए नई पीढ़ी को कड़ी मेहनत करनी पड़ रही है।

बदले हुए प्रतिस्पर्धी माहौल में कमान संभालने के लिए केवल उत्तराधिकारी होना ही काफी नहीं रह गया है। अपने बड़ों से मिले उद्योगों को विस्तार देने के लिए नई पीढ़ी बाकायदा लंबा प्रशिक्षण ले रही है।

राजपाट हासिल करने की मशक्कत यहीं खत्म नहीं हो जाती। इसके बाद उद्योगपतियों के ये प्रशिक्षित बच्चे अपनी ही कंपनियों में छोटे स्तर से काम की शुरुआत कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि अब उत्तराधिकारी बनाने के तरीकों में काफी बदलाव आ चुका है। पुराने समय में व्यापारिक घरानों के बेटे-बेटियों को सीधे मुख्य कार्यकारी अधिकारी या उप-मुख्य कार्यकारी अधिकारी बना दिया जाता था, लेकिन अब उद्योगपतियों के पुत्र-पुत्रियां काफी कम उम्र में ही परिवारिक व्यवसाय में शामिल हो जाते हैं और उन्हें छोटे पद पर नियुक्ति दी जाती है। समय के साथ उनका पद बढ़ता रहता है।

हाल ही में रियल्टी क्षेत्र की कंपनी डीएलएफ के चेयरमैन केपी सिंह के नाती ने कंपनी में बतौर ट्रेनी अपना करियर शुरू किया है। करीब 190 साल पुराने आरपीजी समूह की एक अलग कॉरपोरेट इकाई की घोषणा करते हुए उद्योगपति संजीव गोयनका पिछले सप्ताह अपने 21 वर्षीय बेटे शाश्वत गोयनका के साथ बैठे दिखाई दिए। संजीव ने कहा कि उनका बेटा व्हार्टन से स्नातक होने के बाद कारोबार में शामिल होगा।

इससे पहले इसी साल मुकेश अंबानी जब लंदन में बीपी के साथ 7.2 अरब डॉलर का करार करने गए थे, तब उनके बेटे आकाश भी साथ थे। आकाश की मौजूदगी से यह अटकलें शुरू हुई थीं कि उन्हें देश की सबसे मूल्यवान कंपनी का मुखिया बनने के लिए तैयार किया जा रहा है। हालांकि, रिलायंस इंडस्ट्रीज ने आकाश के समूह में शामिल होने के बारे में कुछ नहीं कहा है।

पिछले कुछ समय में कई और कंपनियों के प्रमुखों के बेटे-बेटियों को समूह में विभिन्न पदों पर शामिल किया गया है। वित्तीय सलाहकार सेवाएं देने वाली कंपनी प्राइसवाटरहाउस कूपर्स के कार्यकारी निदेशक राजन वधावन कहते हैं कि अब कंपनियां केवल परिवार के लोगों को रखने पर ही ध्यान नहीं दे रही हैं, बल्कि वे बाहरी लोगों को भी नियुक्त कर रही हैं।

वधावन ने कहा कि यह समूह पर निर्भर करता है, जैसे टाटा समूह बाहरी उम्मीदवारों को भी नियुक्त करता है। समूह ने उत्तराधिकारी की तलाश के लिए एक समिति बनाई है। रतन टाटा दिसंबर 2012 में सेवानिवृत्त होने वाले हैं।

आइटी कंपनी विप्रो के प्रमुख अजीम प्रेमजी के पुत्र रिषद को कंपनी में निचले स्तर पर चार साल पहले शामिल किया गया था। उन्हें इसी साल कंपनी का मुख्य रणनीति अधिकारी बनाया गया है। प्रेमजी का कहना है कि रिषद को कंपनी में अपनी जगह खुद बनानी होगी।

पिछले साल भारती समूह के प्रमुख सुनील मित्तल के बेटे श्रविण को कंपनी में प्रबंधक बनाया गया था। इसी तरह विजय माल्या प्रवर्तित यूबी समूह, शिव नादार प्रवर्तित एचसीएल, किशोर बियानी की अगुवाई वाले फ्यूचर समूह, गोदरेज, पिरामल और टीवीएस समूहों में प्रमुखों के पुत्र या पुत्री को समूह के कारोबार से जोड़ा गया है।

वहीं, इन्फोसिस, एचडीएफसी, एक्सिस बैंक और आइसीआइसीआइ बैंक में नए उत्तराधिकारी को परिवार के बाहर से लाया गया है।

Posted on Jul 18th, 2011
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Posted in :  व्यापार     
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