एनआरएचएम घोटाले पर कोर्ट सख्त

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लखनऊ करोड़ों के एनआरएचएम घोटाले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने यूपी सरकार से दवाओं व उपकरणों की खरीद फरोख्त का पूरा ब्योरा 4 अगस्त को तलब किया है। पीठ ने घोटाले के तौर-तरीकों को जानने को उन टेंडर व ठेकों की भी जानकारी मांगी है, जिसके तहत सरकार ने कई फर्मो के जरिये दवा, एंबुलेंस व चिकित्सीय उपकरण आदि की खरीदारी की थी।

साथ ही केंद्र सरकार से भी इस मामले में पक्ष रखने को कहा है। न्यायमूर्ति प्रदीपकांत तथा रितुराज अवस्थी की खंडपीठ ने एक जनहित याचिका पर यह आदेश दिए हैं। पीठ ने सरकार से कहा, घोटाले की जानकारी होने पर सरकार ने 11 जुलाई को 7 जांच समितियां बनाई थीं। इनकी रिपोर्ट भी पेश करें। साथ ही उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक कारपोरेशन द्वारा दवाओं की खरीद के लिए आवंटित ठेकों का भी ब्योरा तलब किया है।

पीठ ने केंद्र से जानना चाहा है कि एनआरएचएम के फंड का आवंटन तथा खर्च की पूरी प्रक्रिया क्या रही। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्वयं एक प्रश्न उठाया कि यदि कोई दवा दो रुपये कीमत की है और उसे छह रुपये में खरीदा जाये तो इसे घोटाला कहा जाएगा अथवा नहीं।

पीठ ने यह भी कहा कि कैग जांच से क्या घोटाले के आपराधिक आशय का पता चल पाएगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि जानकारी के लिए जरूरी है कि इससे संबंधित फर्मो व एजेंसियों को कितना ठेका दिया गया और किस मद में कितना भुगतान व खर्च हुआ।

Posted on Jul 29th, 2011
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Posted in :  भ्रस्टाचार     
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