रिक्शाचालकों, बुनकरों को पेंशन-हेल्थ बीमा

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असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले करोड़ों कामगारों को भी अब जीवन बीमा, पेंशन, स्वास्थ्य बीमा जैसी सुविधाएं मिल सकेंगी। केंद्र सरकार ने अपने पुराने वादे को अमल में लाते हुए एक हजार करोड़ रुपये से एक राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा कोष गठित करने का फैसला किया है।

इस कोष से ही बुनकरों, रिक्शाचालकों, ताड़ी बनाने वालों, बीड़ी मजदूरों सहित असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले अन्य दर्जनों पेशों को सामाजिक सुरक्षा का कवच पहनाया जाएगा। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई कैबिनेट की बैठक में इस बारे में एक प्रस्ताव को हरी झंडी दिखा दी गई।

इस बारे में वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने वर्ष 2010-11 का बजट पेश करते हुए घोषणा की थी, लेकिन उसे अमल में नहीं लाया जा सका था। कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए सूचना व प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने बताया कि केंद्रीय श्रम व रोजगार मंत्रालय इस योजना को लागू करेगा।

असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को सामाजिक सुरक्षा देने के लिए वर्ष 2008 में एक कानून बनाया गया था। योजना यह है कि इन मजदूरों के लिए कई तरह की सामाजिक सुरक्षा स्कीमें विकसित की जाएं। इसमें वृद्धावस्था पेंशन से लेकर स्वास्थ्य बीमा जैसी सेवाएं तक शामिल होंगी।

सरकारी सूत्रों ने बताया कि यह दुनिया में अपनी किस्म की अनूठी योजना होगी। योजना को तैयार करने का काम अब शुरू होगा। कोशिश यह होगी कि कोई ऐसी योजना शुरू की जाए जो इन मजदूरों की कई तरह की वित्तीय जरूरतों को पूरी कर सके।

मसलन, एक ही पॉलिसी के तहत इन्हें जीवन बीमा और स्वास्थ्य बीमा की सुविधा मिल जाए। असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को दो वर्गो में बांटकर उनके लिए अलग-अलग स्कीमें बनाई जा सकती हैं। मसलन, हथकरघा मजदूरों और बुनकरों को एक वर्ग में रखा जाएगा, जबकि कूड़ा बीनने वालों, सफाई करने वालों या रिक्शाचालकों के लिए एक दूसरा वर्ग होगा।

इनकी जरूरतें अलग-अलग किस्म की हैं और इनकी वित्तीय स्थिति भी भिन्न होती है। सरकार की मंशा इन मजदूरों को 25 हजार रुपये तक की चिकित्सा सुविधा मुफ्त देने की है। साथ ही दुर्घटना होने पर मजदूरों के परिवार को आर्थिक मदद भी दी जाएगी।

Posted on Jul 29th, 2011
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Posted in :  व्यापार     
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