2जी स्पेक्ट्रम में होगी चितंबरम से पूछताछ

Font Size : अ- | अ+ comment-imageComment print-imagePrint

2जी स्पेक्ट्रम मामलों में कठघरे में खड़े पूर्व संचार मंत्री ए राजा के बयानों में घिरे पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम को भी पूछताछ के लिए संयुक्त संसदीय समिति [जेपीसी] में बुलाया जाएगा।

जेपीसी अध्यक्ष पीसी चाको ने माना है कि समिति में उन्हें गवाही के लिए बुलाने की मांग उठी और अब विचार किया जा रहा है कि किन-किन वित्त मंत्रियों को बुलाया जाए। वैसे स्पेक्ट्रम आवंटन में निजी कंपनियों को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से लाभ पहुंचाने वाले लोगों की लंबी फेहरिस्त हो सकती है।

सरकार ने उस वक्त दूरसंचार कंपनियों की कथित खराब स्थिति पर कोई ठोस अध्ययन किए बिना ही पैकेज का विचार कर लिया।

कई सांसद भी दूरसंचार कंपनियों को रियायत दिलाने की कवायद में जुटे थे। वर्ष 1998 में विभिन्न दलों के 50 सांसदों ने तत्कालीन प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कंपनियों के लिए रियायत का आग्रह किया था।

गुरुवार को जेपीसी की बैठक में वित्त मंत्रियों को भी गवाही के लिए बुलाए जाने की मांगे उठी। गौरतलब है कि पूर्व मंत्री ए राजा ने कोर्ट में पीएम के साथ-साथ तत्कालीन वित्त मंत्री पी. चिदंबरम को भी लपेट लिया था।

चाको ने एक सवाल के जवाब में स्वीकारा कि कुछ सदस्यों ने इसकी मांग की है। लिहाजा जेपीसी चिदंबरम समेत कई पूर्व वित्त मंत्रियों को भी पूछताछ के लिए बुलाएगी।

बैठक में यूं तो पूर्व दूरसंचार सचिव एवी गोकाक की गवाही थी, लेकिन इस दौरान कई राजनेता बेपर्दा हो गए। जेपीसी के अध्यक्ष पीसी चाको ने बताया कि 1998 में 50 सांसदों ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर आग्रह किया था कि दूरसंचार कंपनियों की खराब हालत को देखते हुए उन्हें राहत दी जाए।

पत्र में सभी सांसदों के सिर्फ हस्ताक्षर हैं। लिहाजा पहली नजर में उनकी पहचान नहीं की जा सकती है। लेकिन उसमें विभिन्न दलों के सदस्य शामिल हैं।

लिहाजा जेपीसी ने दूरसंचार विभाग से कहा है कि वह इस पत्र की पूरी पड़ताल करे और पता लगाए कि प्रधानमंत्री ने उसे कितनी गंभीरता से लिया था। बहरहाल यह स्पष्ट है कि कंपनियों के बचाव में कई सांसद भी जोरशोर से जुटे थे।

1996-98 के दौरान दूरसंचार सचिव रहे गोकाक के निर्णय भी विवादास्पद हैं। गौरतलब है कि तत्कालीन प्रधानमंत्री आइके गुजराल के निर्णय को खारिज करते हुए उन्होंने दूरसंचार उद्योग के बाबत अध्ययन का जिम्मा औपचारिक रूप से ब्यूरो ऑफ इंडस्ट्रियल कॉस्ट एंड प्राइसेस [बीआईसीपी] को दिया था। लेकिन कार्रवाई आइसीआइसीआइ की रिपोर्ट पर हुई। यह और बात है कि दूरसंचार मंत्रालय की फाइलों में कहीं भी आईसीआईसीआई का जिक्र नहीं है। इस अध्ययन के लिए उसे कोई पारिश्रमिक भी नहीं दिया गया। फिर भी उसने रिपोर्ट दी और उसी के आधार पर कंपनियों के लाइसेंस की अवधि 10 वर्ष से बढ़ाकर 15 वर्ष कर दी गई। जाहिर है कि इस फैसले से सरकार को भारी आर्थिक क्षति हुई होगी। बहरहाल इस सबके लिए जिम्मेदार गोकाक ने इसे उस समय की जरूरत बताया।

जेपीसी की अगली बैठक 2-3 अगस्त को होगी जिसमें 1998 से 2000 तक दूरसंचार सचिव रहे अनिल कुमार की गवाही होगी।

Posted on Jul 29th, 2011
SocialTwist Tell-a-Friend
Posted in :  अपराध, ब्रेकिंग न्यूज     
Subscribe by Email

Leave a comment

Type Comments in Indian languages (Press Ctrl+g to toggle between English and Hindi OR just Click on the letter)


विदेश

राज्य

महिला

अपराध

ब्यूटी