सांप्रदायिकता और आतंकवाद बड़ी चुनौती :मनमोहन सिंह

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सांप्रदायिकता और आतंकवाद को एक बड़ी चुनौती करार देते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शुक्रवार को कहा कि कुछ दिग्भ्रमित लोगों के कारण राष्ट्र का नाम खराब होता है। उन्होंने देश से इस समस्या से मिलकर लड़ने की अपील की।

सिंह ने कहा कि सांप्रदायिकता और आतंकवाद हमारी एकता और आखंडता के लिए एक बड़ी चुनौती बन गए हैं। हमारे समाज के कुछ दिग्भ्रमित लोग इसे बढ़ावा देते हैं। लेकिन इसके कारण हमारे पूरे समाज और देश का नाम खराब होता है।

इस चुनौती का सामना करने के लिए हमें मिलकर काम करना होगा। हमें हर समय सतर्क रहना होगा। वह राष्ट्रीय सांप्रदायिकता सौहार्द पुरस्कार दिए जाने के समारोह में संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि हमारे देश में साझा सहिष्णुता और सांप्रदायिकता भाईचारे की मजबूत परंपरा रही है। हमारी एकता और अखंडता का सम्मान करना हमारी संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हमें इस परंपरा को बनाए रखना है।

महात्मा गांधी को उद्धृत करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि एकता बनाए रखने की हमारी इच्छच् तभी पूरी हो सकती है जब हममें एक-दूसरे के लिए प्यार की भावना हो।

सिंह ने कहा कि यह हमारा कर्तव्य है कि हम विभिन्न समुदायों के बीच सामाजिक संबंधों को सुधारने की कोशिशों में अपना योगदान दें। हमारे देश में शांति और सांप्रदायिक सौहार्द तभी संभव है जब उसमें हमारे नागरिकों की सक्रिय भागीदारी हो।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सभी नागरिकों को सहिष्णुता और आपसी भाईचारे के संदेश को देश के हर कोने में फैलाना चाहिए। इस मौके पर उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी ने कहा कि देश को सांप्रदायिक अशांति से निपटने के लिए व्यापक एहतियाती नजरिया अपनाने की और सांप्रदायिक सौहार्द को बढ़ावा देने के लिए सजग कार्यक्रम की जरूरत है।

अंसारी ने कहा कि सरकार के पास सांप्रदायिक अशांति के मामलों में हस्तक्षेप करने के अलावा कोई और विकल्प नहीं होता। इस तरह के हस्तक्षेप की प्रक्रिया एहतियाती या सुधारात्मक हो सकती है। सांप्रदायिक अशांति के उदाहरणों के मद्देनजर आम तौर पर सुधारात्मक उपायों पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। यह जरूरी तो है लेकिन पर्याप्त नहीं है।

राष्ट्रीय सांप्रदायिक सौहार्द पुरस्कार से मोहम्मद हनीफ खान शास्त्री [वर्ष 2009 के लिए] और आचार्य लोकेश मुनि [वर्ष 2010 के लिए] नवाजे गए हैं। वर्ष 2009 के लिए इस पुरस्कार से सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स एंड सोशल हारमनी को भी सम्मानित किया गया है।

केंद्रीय गृहमंत्री पी. चिदंबरम ने इस मौके पर कहा कि इस पुरस्कार की शुरुआत वर्ष 1996 में हुई थी ताकि साम्प्रदायिक सौहार्द और राष्ट्रीय एकता के मकसद के लिए काम कर रहे व्यक्तियों और संगठनों के योगदान को पहचान दी जा सके।

Posted on Jul 29th, 2011
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Posted in :  बड़ी खबर     
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