अन्ना ने सरकार के होश ठिकाने लगाए

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केंद्र सरकार के लिए अन्ना हजारे को हल्के में लेना महंगा पड़ा। अन्ना और उनके सहयोगियों को हिरासत में लेने और गिरफ्तार करने की खबर जंगल की आग की तरह फैली और इसी तेजी से देश भर में आम जनता पर सड़कों पर उतर आई।

अन्ना के समर्थन में दिल्ली की सड़कों पर तो हुजूम उमड़ा ही, शेष देश के हर हिस्से और यहां तक कि गंवों और कस्बों में भी विरोध प्रदर्शन होने लगे। प्रणब, चिदंबरम, सिब्बल सहित केंद्रीय मंत्रियों का पूरा जत्था दिन भर अन्ना की गिरफ्तारी को जायज बताता रहा, लेकिन शाम तक उसके हाथ-पांव फूल गए और उसे 12 घंटे के अंदर ही अन्ना और उनके साथियों की रिहाई का फैसला करना पड़ा।

इसके बावजूद उसकी मुश्किल कम नहीं हुई है, क्योंकि अन्ना सरकारी शर्तो पर रिहा होने को तैयार नहीं। सरकार उन्हें रिहा करने के बाद उनके गांव भेजने की सोच रही थी। अन्ना ने उसकी रणनीति पर पानी फेर दिया। देर रात तिहाड़ प्रवक्ता को यह कहना पड़ा कि हमने तो अन्ना को रिहा कर दिया, लेकिन अन्ना जेपी पार्क में अनशन की इजाजत मिले बगैर रिहा होने को तैयार नहीं।

तिहाड़ के बाहर जमा भारी भीड़ भी घर जाने को तैयार नहीं। सरकार के सामने एक अन्य मुश्किल यह है कि जहां देश भर में उसके प्रति गुस्सा उबाल पर है वहीं विपक्ष एकजुट होकर संसद में उसे सबक सिखाने के मूड में है। संप्रग के कुछ सहयोगी भी सरकार की खबर लेने के तेवर दिखा रहे हैं। देशव्यापी गुस्से और आपातकाल लगाने के आरोपों से बदहवास सरकार को कोई राह नहीं सूझ रही।

मंगलवार की सुबह जिस अंदाज में अन्ना को उठाया गया और न्यायिक हिरासत के जरिये तिहाड़ भेजा गया उससे लगा कि सरकार सख्त हो रही है, लेकिन हालात बिगड़ते देख शाम सात से आठ बजे के बीच उसकी अकड़ ढीली पड़ गई। पुलिस ने यह कहते हुए आरोप वापस ले लिए कि अनशन का वक्त खत्म होने के बाद अन्ना को रिहा करने का फैसला किया जा रहा है।

अन्ना के साथ गिरफ्तार किरण बेदी व शांति भूषण को शाम को ही छोड़ दिया गया। किरण बेदी ने कहा कि अन्ना अनशन जारी रखेंगे-या तो जेपी पार्क में या फिर रामलीला मैदान में। मनीष सिसोदिया करीब साढ़े दस बजे रिहा हुए। अरविंद केजरीवाल को अन्ना के साथ रिहा होना है।

सूत्रों के अनुसार अन्ना को रिहा करने का फैसला प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल और राहुल गांधी की प्रधानमंत्री कार्यालय में बैठक के बाद लिया गया। अन्ना की रिहाई के फैसले के बाद भी विपक्ष के तेवर तीखे हैं और वह इस पूरे मामले पर संसद में प्रधानमंत्री के बयान पर अड़ा है।

सरकार की लोकतंत्र विरोधी दमनकारी नीतियों के खिलाफ भाजपा व वामदल बुधवार को देशव्यापी आंदोलन शुरू करने जा रहे हैं। मंगलवार को संसद के दोनों सदनों में सरकार व विपक्ष के बीच हुए टकराव ने विपक्ष को फिर से एकजुट कर दिया।

Posted on Aug 17th, 2011
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Posted in :  बड़ी खबर     
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