डीएलएफ पर 630 करोड़ रुपये का जुर्माना

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एजेंसी : भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआइ) ने देश की दिग्गज रियल्टी कंपनी डीएलएफ पर 630.43 करोड़ रुपये का जुर्माना ठोका है। अपनी प्रभावशाली स्थिति का दुरुपयोग करने और कंपनी की गुड़गांव परियोजना में फ्लैट बुक कराने वालों पर अनाप शनाप शर्ते थोपने पर आयोग ने यह फैसला सुनाया है।

डीएलएफ की रियल्टी परियोजना में फ्लैट बुक कराने वाले कुछ लोगों की शिकायत पर पिछले साल मई में आयोग ने महानिदेशक (जांच) को मामले की जांच करने को कहा था। शिकायत के अनुसार डीएलएफ ने गुड़गांव में बिलेयर नाम की आवासीय परियोजना को वर्ष 2009 में पूरा करने का वादा किया था लेकिन खरीदारों को अभी तक फ्लैट नहीं मिल पाए हैं।

इतना ही नहीं डीएलएफ ने खरीदारों को बताए गए वास्तविक फ्लोर की तुलना में अपार्टमेंट में मंजिलों की संख्या भी बढ़ा दी। इससे इस आवासीय परियोजना में फ्लैट की संख्या 384 से बढ़कर 564 तक पहुंच गई।

आयोग ने डीएलएफ को प्रतिस्पर्धा अधिनियम 2002 की धारा 4 (2) के उल्लंघन का दोषी पाया है। यह जुर्माना कंपनी के पिछले तीन साल के औसत सालाना कारोबार का सात फीसदी है। इस फैसले पर डीएलएफ समूह के कार्यकारी निदेशक राजीव तलवार ने कहा कि हम अभी इस आदेश का अध्ययन कर रहे हैं। हमारे पास इस पर कानूनी राय लेने का भी विकल्प है। आयोग ने केंद्र और राज्य सरकारों को रियल्टी क्षेत्र के लिए नियामक का गठन करने का सुझाव भी दिया है।

इससे न सिर्फ ग्राहकों के हितों की सुरक्षा होगी बल्कि इस क्षेत्र में पारदर्शिता भी बढ़ेगी। आयोग ने कहा कि रियल्टी कंपनियां बिना जमीन खरीदे या रजिस्ट्री कराए और संबंधित प्राधिकरण से मंजूरी के बगैर ही परियोजानाएं लांच कर देती हैं।

साथ ही ग्राहकों को प्लाट, फ्लैट या घर का सही ब्योरा भी नहीं देती कि इसका कारपेट और यूटिलिटी एरिया क्या होगा, किस तारीख तक इनकी डिलीवरी की जाएगी और देरी होने पर ग्राहकों को क्या मुआवजा दिया जाएगा।

Posted on Aug 17th, 2011
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Posted in :  व्यापार     
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