जेटली ने दिखाया जस्टिस सौमित्र को आइना

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राज्यसभा में महाभियोग का सामना कर रहे न्यायाधीश सौमित्र सेन ने भले ही अपने भावनात्मक और ओजपूर्ण तर्को के सहारे बचाव की कोशिश की हो, लेकिन नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली ने तथ्यों को सामने रखकर उनके बचाव तर्को को सिरे से खारिज कर दिया।

आरोपी न्यायाधीश सेन ने सदन में जिस अंदाज मेंदो घंटे तक अपना बचाव किया, उस पर जेटली ने कहा कि आरोपी न्यायाधीश तकनीकी आधार पर, तथ्यों के अभाव और सबूतों को तोड़मरोड़ कर वादी व प्रतिवादियों के लिए आदर्श नहीं बन सकते हैं।

राज्यसभा में महाभियोग की शुरुआत करते हुए माकपा के सीताराम येचुरी ने इस मामले में सदन में पेश रिपोर्ट पर चर्चा कराने का आग्रह किया। राज्यसभा में पहली बार किसी न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग चलाया जा रहा है।

येचुरी ने प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि इसका मकसद न्यायपालिका के खिलाफ कोई टिप्पणी करना नहीं है। यह प्रस्ताव हेराफेरी करने वाले व्यक्ति के खिलाफ नहीं है, बल्कि जांच समिति की रिपोर्ट को मंजूर कर सदन न्यायपालिका की ईमानदारी पर उंगली उठने से रोक सकता है।

नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली ने न्यायपालिका की छवि को स्वच्छ बनाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि न्यायाधीश सेन ने धन की हेराफेरी संबंधी आरोपों के बारे में सही तथ्यों को छिपाया। विधिक प्रणाली को गुमराह करने के साथ सेन ने खुद को ऐसे पेश किया, जैसे वे दोषी नहीं हैं। अपने तथ्यों को रखने और अपनी बात कहने का उनको पूरा समय दिया गया। लेकिन वे जांच समिति के समक्ष उपस्थित नहीं हुए। ऐसे जजों को पदों पर नहीं रखा जा सकता है।

जेटली ने धन के गबन और हेराफेरी से जुड़े मामले को परत-दर-परत खोलते हुए कई सवाल पूछे। सरकारी रिसीवर होते हुए तत्कालीन एडवोकेट सेन ने हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद कई सालों तक धन का कोई हिसाब नहीं दिया।

धन की जबरदस्त हेराफेरी हुई है। बैंक के उसी खाते से क्रेडिट कार्ड के बिल का भुगतान भला कैसे किया जा सकता है। कलकत्ता हाईकोर्ट के तत्कालीन जजों और सुप्रीम कोर्ट के जजों पर अनर्गल आरोप लगाकर खुद को सही साबित करने की उनकी कोशिश उचित नहीं है।

जेटली ने कहा कि जज भी अब शीशे के घरों में रहने लगे हैं।

हालांकि अपने बचाव में सेन ने पूर्वाग्रह का आरोप लगाते हुए कहा कि उन पर मुकदमा दर्ज चलाने से पहले ही फैसला कर लिया गया था।

उन्हें न्यायपालिका में स्वच्छता के नाम पर बलि का बकरा बनाया जा रहा है। सेन ने सदन के सदस्यों से कहा कि आप हमारे भी प्रतिनिधि हैं। जब न्यायाधीश को न्यायपालिका से न्याय नहीं मिल पाएगा तो भला आम आदमी का क्या होगा?

उन्होंने महाभियोग चलाने पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि उनके खिलाफ किसी ने आरोप ही नहीं लगाया तो फिर महाभियोग किस बात का।

Posted on Aug 18th, 2011
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Posted in :  हिंदुस्तान     
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