मुंबई के डिब्बावालों ने अपनी 120 साल पुरानी परम्परा तोड़ी

Font Size : अ- | अ+ comment-imageComment print-imagePrint

मुम्बई के डिब्बावालों ने 120 साल के अपने इतिहास में शुक्रवार को पहली बार हड़ताल की। इन डिब्बावालोंके सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन में कूदने से कई दफ्तरों में टिफिन नहीं पहुंचे।

मुम्बई के करीब दो लाख कामकाजी लोग दोपहर के भोजन के लिए इन डिब्बावालों पर निर्भर हैं लेकिन शुक्रवार को उनके पास दो ही विकल्प थे। वे या तो अपने कार्यालय की कैंटीन में जाकर भोजन कर सकते थे या नजदीक के किसी रेस्तरां से खाना मंगा सकते थे।

वैसे शुक्रवार को नवरोज मतलब पारसी नव वर्ष के अवसर पर कुछ लोग अवकाश पर भी थे।

वित्त व्यवसायी अक्षय मागजी के लिए यह कामकाजी दिन था और ऐसे में बाहर खाना खाने के लिए समय निकालने में उन्हें परेशानी हुई। उन्होंने बताया, “यह मुझ पर अतिरिक्त दबाव था। गुरुवार को भी बसों और रेलगाड़ियों की हड़ताल के कारण परेशानी का सामना करना पड़ा था।”

उन्होंने कहा कि बाहर खाना खाने के लिए अतिरिक्त समय तो देना ही पड़ता है साथ ही घर जैसा अच्छा भोजन भी नहीं मिलता।दक्षिणी मुम्बई में चर्चगेट स्टेशन से आजाद मैदान तक 5,000 से ज्यादा डब्बावालों ने अन्ना के समर्थन में रैली निकाली।नूतन डब्बावाला ट्रस्ट के सचिव किरण गवांडे ने कहा, “हम शुक्रवार टिफिन न पहुंचाकर अपनी 120 साल पुरानी परम्परा तोड़ रहे हैं। ..अन्ना के समर्थन में हम कम से कम इतना तो कर सकते हैं।”

Posted on Aug 19th, 2011
SocialTwist Tell-a-Friend
Posted in :  ब्रेकिंग न्यूज     
Subscribe by Email

Leave a comment

Type Comments in Indian languages (Press Ctrl+g to toggle between English and Hindi OR just Click on the letter)


विदेश

राज्य

महिला

अपराध

ब्यूटी