दुश्मन के रडार को चकमा देने आया सतपुड़ा

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मुंबई जलमार्ग से निरंतर खतरा महसूस कर रहे भारत को नई ताकत देने के लिए आइएनएस सतपुड़ा ने मोर्चा संभाल लिया है। स्वदेशी तकनीक से बना 142.5 मीटर लंबा और 6,200 टन वजन वाला यह जंगी जहाज अपनी विशिष्ट तकनीक के कारण कई मामलों में बेजोड़ है।

नौसेना प्रमुख एडमिरल निर्मल वर्मा ने शनिवार को यहां राष्ट्रगान की धुन के बीच आइएनएस सतपुड़ा को भारतीय नौसेना में शामिल करने की घोषणा की। सतपुड़ा शिवालिक श्रेणी का स्टेल्थ जहाज है।

स्टेल्थ जहाज समुद्र में दुश्मन के रडार को चकमा देने में सक्षम होते हैं। सतपुड़ा के निर्माण से भारत उन चुनिंदा आठ देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है जो स्वदेशी तकनीक से स्टेल्थ लड़ाकू जहाज बनाने में सक्षम हैं। आइएनएस सतपुड़ा की परिकल्पना और डिजाइन इंडियन नेवल डिजाइन टीम ने तैयार किया, जिसके आधार पर मुंबई के मझगांव डॉकयार्ड लिमिटेड में इसका निर्माण किया गया।

इसी वर्ष अप्रैल में इस श्रेणी का पहला जहाज आइएनएस शिवालिक नौसेना में शामिल किया गया था। इस श्रेणी का तीसरा और अंतिम जहाज भी जल्द ही नौसेना की सेवा के लिए तैयार हो रहा है। यानी, भारतीय नौसेना अब खरीदार नौसेना से स्वावलंबी नौसेना की छवि भी पुख्ता करती जा रही है।

आइएनएस सतपुड़ा पर लगी मिसाइलें सतह से सतह, सतह से पानी और सतह से हवा में मार करने में सक्षम हैं। 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पानी में चल सकने वाले इस जहाज में लगे चार डीजल आल्टरनेटर चार मेगावाट बिजली पैदा करेंगे, जो किसी बड़े शहर की बिजली की आवश्यकता पूरी करने में सक्षम हैं।

जहाज में लगा अपनी तरह का अनोखा टोटल एटमॉसफेयरिक कंट्रोल सिस्टम (टीएसीएस) जहाज को हमेशा शुद्ध हवा की आपूर्ति तो करेगा ही जहाज पर सवार 35 अधिकारियों व 235 नाविकों को किसी भी प्रकार के रेडियोएक्टिव, रासायनिक और जैविक प्रदूषणों से भी बचाएगा।

Posted on Aug 21st, 2011
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Posted in :  हिंदुस्तान     
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