सरकार लोकपाल पर संसद में बहस को तैयार

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अन्नागीरी ने रंग दिखाया। दस दिन के अनशन के बाद आखिरकार सरकार ने अन्ना हजारे की ज्यादातर मांगों को मान लिया है। शुक्रवार से संसद में जन लोकपाल विधेयक पर चर्चा होगी।

साथ ही अन्ना ने भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए जो तीन अन्य अहम उपाय बताए थे, उन्हें भी मानने का सरकार लिखित भरोसा देने जा रही है। संसद में जन लोकपाल विधेयक पर चर्चा शुरू होने के साथ ही अन्ना शुक्रवार को अपना अनशन खत्म कर सकते हैं।

टीम अन्ना और सरकार के बीच चल रही बातचीत बुधवार को जहां टूट के कगार पर पहुंच गई थी, वहीं गुरुवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के दखल के साथ यह न सिर्फ पटरी पर आई, बल्कि अंजाम के बिल्कुल करीब तक पहुंच गई।

इस बार प्रधानमंत्री ने अपना दूत चुना अन्ना के गृहराज्य महाराष्ट्र के अपने कैबिनेट सहयोगी विलासराव देशमुख को। पहले प्रधानमंत्री ने संसद में यह वादा किया कि सरकार जन लोकपाल विधेयक सहित लोकपाल संबंधी तीनों मसौदों पर चर्चा के लिए तैयार है।

इसके तुरंत बाद अन्ना का मान रखने के लिए देशमुख सीधे रामलीला मैदान पहुंच गए। देशमुख के पहुंचने से पहले अन्ना ने अपने सहयोगियों के साथ विस्तृत बैठक की।

देशमुख ने अन्ना से मिलकर प्रधानमंत्री और सरकार की ईमानदार मंशा के बारे में उन्हें आश्वस्त करने की पुरजोर कोशिश की। संसद में प्रधानमंत्री के साथ ही पूरे सदन के भरोसे से अन्ना काफी संतुष्ट हो चुके थे।

मगर तीन बातें अब भी थीं, जिनके पूरा हुए बिना वे कोई वादा नहीं करना चाहते थे। अन्ना ने प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखकर कहा कि मेरे साथ देश भर में इतने लोग इस उम्मीद से जुड़े हैं कि उन्हें भ्रष्टाचार से निजात मिलेगी।

इसके लिए जरूरी है कि राज्यों में भी लोकायुक्त के गठन के लिए कानून पास हो। आम लोगों को रोजाना जिन अधिकारियों के भ्रष्टाचार से दो-चार होना पड़ता है, उनके भ्रष्टाचार से लड़ने की व्यवस्था हो। इसी तरह सभी सरकारी सेवाओं के लिए समयसीमा तय हो और उन्हें समय पर पूरा नहीं करने वाले अधिकारी पर जुर्माना लगे।

अन्ना की यह चिट्ठी लेकर देशमुख दोबारा प्रधानमंत्री के पास पहुंचे। उन्होंने इस पर अपने वरिष्ठ सहयोगियों वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी और रक्षा मंत्री एके एंटनी से चर्चा कर तय किया कि इन्हें मान लेने में कोई बुराई नहीं है।

जल्द ही सरकार की ओर से इस संबंध में लिखित आश्वासन अन्ना को दे दिए जाने की उम्मीद है। जन लोकपाल विधेयक पर शुक्रवार को संसद में चर्चा शुरू होने के साथ ही अन्ना अपना अनशन तोड़ सकते हैं। लेकिन, विधेयक संसद से पारित होने तक वे अपना आंदोलन जारी रखेंगे।

Posted on Aug 25th, 2011
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Posted in :  बड़ी खबर     
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