कल्याण के गढ़ में चुनाव लड़ेंगी उमा भारती

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एटा भाजपा ने कल्याण को उनके घर में ही घेरने की रणनीति बना ली है। लोध बहुल सीट मारहरा से उमा भारती भाजपा की सारथी बन सकती हैं। इस नए समीकरण से कल्याण का गणित गड़बड़ा सकता है। चुनाव का रुख पलटने को भाजपा की यह चाणक्य नीति मानी जा रही है।

अंदरखाने की इस कसरत की हलचल सियासत के धरातल पर महसूस हो रही है। सियासी तरकश से यह तीर भले ही बाहर न निकला हो, लेकिन इससे कल्याण को मूर्छित करने की गंध आने लगी है। निशाना नए परिसीमन में लोध राजपूतों की बहुलता के रूप में स्थापित हुई मारहरा विधानसभा सीट पर है।

शुरुआती दौर में भाजपा और कल्याण के बीच समझौते के आसार बने थे। जिसके कारण भाजपा नेतृत्व ने एटा जनपद की सात विधानसभा सीटों पर प्रत्याशियों के चयन में काफी विलंब भी किया। कल्याण पहले ही सभी सात सीटों पर अपने प्रत्याशी घोषित कर चुके थे और भाजपा विरोधी तेवरों से एहसास करा दिया था कि कल्याण और भाजपा दो अलग ध्रुव हैं।

हालांकि भाजपा का शीर्ष नेतृत्व की इस सियासी चाल को एकदम गोपनीय रखा गया है। मगर आभास होने लगा है कि भाजपा ने मारहरा विधानसभा सीट के चुनावी दंगल में पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती को उतारने का मन बना लिया है।

वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव में कल्याण ने सभी आठ सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे, लेकिन कामयाबी सिर्फ दो सीटों पर मिली थी। भाजपा और कल्याण की तकरार अब जल्द ही सियासत की नई सुर्खियों में देखने को मिलेगी।

हालांकि, भाजपा नेतृत्व ने मारहरा विधानसभा सीट पर एटा सदर से विधायक प्रजापालन वर्मा के अनुज विपिन वर्मा डेविड को प्रत्याशी बनाया है, लेकिन इस सीट से यदि पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती चुनाव मैदान में आती हैं तो डेविड चुनाव मैदान से हट जाएंगे।

जब उनसे इस संदर्भ में बात की गई, तो वे बोले कि उमा जी के आने से अच्छी कोई बात नहीं। वे आएंगी तो वे चुनाव नहीं लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि उनके आने का असर जिले की सभी विधानसभा सीटों पर पड़ेगा।

Posted on Jan 13th, 2012
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Posted in :  ब्रेकिंग न्यूज, राजनीति     
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