तृणमूल से रिश्ते बचाने को झुकी कांग्रेस

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पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के साथ टूटने के कगार पर पहुंच चुके रिश्तों को बचाने के लिए कांग्रेस नेतृत्व को झुकना ही पड़ा। कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के बीच संबंधों में लगातार बढ़ती खटास रोकने के लिए कांग्रेस ने प्रदेश के नेताओं को तृणमूल के खिलाफ तल्ख बयानबाजी न करने की ताकीद की।

साथ ही विवाद की वजह बने इंदिरा भवन पर भी तृणमूल सुप्रीमो और कांग्रेस ने बीच के रास्ते पर सहमति कायम कर ली। तृणमूल व कांग्रेस के बीच गर्मी को ठंडा करने में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह व वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने भी अहम भूमिका निभाई जिन्होंने रेलवे को वित्तीय मदद देने की रेलमंत्री दिनेश त्रिवेदी की मांग पर सकारात्मक रुख दिखाया।

तृणमूल से मतभेद पर गृहमंत्री पी चिदंबरम ने भी बृहस्पतिवार को कहा कि सहयोगियों से बातचीत जारी है। हमें भरोसा है कि सभी मुद्दे सुलझा लिए जाएंगे। कोलकाता में इंदिरा भवन का नाम बदलकर क्रांतिकारी कवि नजरुल इसलाम पर करने से दोनों दलों के बीच पश्चिम बंगाल में सतह पर आई कलह के सिर से गुजर जाने के बाद केंद्रीय नेतृत्व को हस्तक्षेप के लिए मजबूर होना पड़ा।

वरना अगर ममता बनर्जी और उनकी पूरी पार्टी अकेले चुनाव लड़ने और सरकार चलाने की हुंकार भर रही थी तो प्रदेश कांग्रेस के नेताओं ने भी पश्चिम बंगाल सरकार के खिलाफ गली-मोहल्लों और चौराहों पर धरना-प्रदर्शन तेज कर दिए थे।

कांग्रेस की तरफ से इस तरह के संदेश भी दिए जाने लगे थे कि ममता की भरपाई के लिए यूपीए में उत्तर प्रदेश चुनाव बाद सपा या बसपा में से कोई उसमें शामिल हो सकता है। दोनों दलों के बीच चल रही स्नायुतंत्र की लड़ाई में कहीं गठबंधन वाकई न टूट जाए, इसके लिए कांग्रेस और तृणमूल ने दो दिन पहले भरपाई की शुरुआत की।

बंगाल कांग्रेस के प्रभारी डा. शकील अहमद ने राज्य के कांग्रेस नेताओं से बातचीत भी की। कांग्रेस ने संबंधों की तल्खी घटाने के लिए बृहस्पतिवार को पश्चिम बंगाल कांग्रेस के नेताओं को निर्देश जारी किए कि वह तृणमूल के खिलाफ तीखी बयानबाजी न करे।

साथ ही तृणमूल से कांग्रेस के कार्यकर्ताओं से भी कांग्रेस ने अपील की कि वाममोर्चा को हटाने के लिए हुई इस गठजोड़ को कायम रखना प्रदेश और सबके हित में है। कांग्रेस प्रभारी शकील अहमद ने इंदिरा भवन का नाम बदलने के मुद्दे पर भी पानी डाला।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस ममता की दलील से सहमत है। इंदिरा भवन का नाम नहीं बदल रहा है, बल्कि वहां क्रांतिकारी कवि नजरुल इसलाम के नाम से अकादमी खुलने जा रही है।

बुधवार को प्रधानमंत्री व वित्तमंत्री प्रणव मुखर्जी के साथ रेलमंत्री दिनेश त्रिवेदी की बैठक के नतीजों ने भी दोनों दलों के बीच गर्मी को शांत करने में भूमिका निभाई है।

सूत्रों के अनुसार रेलमंत्री की 10000 करोड़ की मांग पर प्रधानमंत्री व वित्तमंत्री ने विचार करने का भरोसा दिया है।

सूत्रों के मुताबिक सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल, अंबिका सोनी, जयराम रमेश और वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी के बीच बंगाल की परिस्थिति पर बैठक हुई है। बनर्जी से वार्ता के लिए जयराम रमेश का नाम शीर्ष पर है। अंबिका सोनी और प्रणब मुखर्जी भी हैं। जयराम तीस्ता जल बंटवारा और भूमि संशोधन विधेयक आदि विवादस्पद मुद्दों पर बनर्जी के साथ बैठक कर चुके हैं।

हाईकमान जयराम को ममता के साथ बंगाल कांग्रेस का विवाद सुलझाने की जिम्मेदारी सौंपने का निर्णय किया। मुखर्जी स्थिति पर नजर रखेंगे और जरूरत पड़ेगा तो अंत में वह खुद ममता के साथ बैठक करेंगे। माह के तीसरे सप्ताह में जयराम रमेश कोलकाता दौर पर आएंगे और संभव है कि वह बनर्जी के साथ बैठ करेंगे।

Posted on Jan 13th, 2012
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Posted in :  हिंदुस्तान     
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