जांची जाएंगी गुजरात की 21 मुठभेड़ें…!

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गुजरात की नरेंद्र मोदी सरकार को बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने झटका देते हुए राज्य में वर्ष 2003 से 2006 के बीच हुई सभी 21 मुठभेड़ों की जांच के आदेश दिए हैं।

कोर्ट ने जस्टिस एमबी शाह की अध्यक्षता वाली समिति से तीन महीने में जांच करके रिपोर्ट देने को कहा है। गुजरात सरकार ने पिछले साल अप्रैल में सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत न्यायाधीश एमबी शाह की अध्यक्षता में मुठभेड़ों की जांच के लिए एक निगरानी समिति/ अथॉरिटी का गठन किया था। सुप्रीम कोर्ट ने इसी समिति को 2003 से 2006 के बीच हुई मुठभेड़ों के मामलों पर भी विचार करने को कहा है।

न्यायमूर्ति आफताब आलम एवं न्यायमूर्ति सीके प्रसाद की पीठ ने जाने माने गीतकार जावेद अख्तर व वरिष्ठ पत्रकार बीजी वर्गीस की याचिका पर सुनवाई करते हुए ये आदेश पारित किए। याचिकाओं में इस दौरान हुई मुठभेड़ों को फर्जी बताते हुए किसी स्वतंत्र एजेंसी से इनकी जांच कराने की मांग की गई है।

पीठ ने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली निगरानी समिति/अथॉरिटी गुजरात की मुठभेड़ों की जांच कर रही है तो वही समिति इन याचिकाओं में उठाए गए मामलों की भी जांच करे। प्रत्येक मामले की गहनता से पड़ताल होनी चाहिए ताकि सच सामने आए।

निगरानी समिति के अध्यक्ष अपनी जांच टीम चुनने के लिए स्वतंत्र होंगे। वे गुजरात के विशेष जांच दल या बाहर से पुलिस अधिकारियों को चुन सकते हैं। इसके अलावा वे पुलिस व मानवाधिकार संगठनों से मामले से जुड़े पुराने रिकार्ड भी मंगा सकते हैं।

हालांकि कोर्ट ने साफ किया है कि निगरानी समिति उन मामलों की जांच नहीं करेगी, जिनकी जांच कोर्ट के आदेश पर कोई और एजेंसी कर रही है। पीठ ने कहा कि समिति के अध्यक्ष यदि चाहें तो याचिकाकर्ताओं अथवा मुठभेड़ के पीडि़तों का पक्ष भी सुन सकते हैं। कोर्ट ने समिति से पीडि़तों को मुआवजा दिए जाने के मुद्दे पर भी विचार करने को कहा है।

वर्गीस व अख्तर की याचिकाओं में मुठभेड़ों पर सवाल उठाते हुए कहा गया था कि मुठभेड़ के तरीकों से पता चलता है कि ये फर्जी थीं। मुठभेड़ के नाम पर एक समुदाय विशेष के लोगों को मारने की बात भी कही गई है।

Posted on Jan 26th, 2012
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Posted in :  अपराध, ब्रेकिंग न्यूज     
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