पाक सेना प्रमुख की राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री को चेतावनी

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लंदन. पाकिस्तान की राजनीति में नया मोड़ आने की आशंका बढ़ रही है। पाकिस्तानी सेना के प्रमुख जनरल अशफाक परवेज कयानी ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि वे प्रशासन को चुस्त दुरुस्त करने के लिए तत्काल कड़े कदम उठाएं। इसी बीच पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने आगाह किया है कि देश में  तख्ता पलट के आसार हैं।

सेना के एक उच्च स्तरीय अधिकारी ने अमेरिका के अखबार द वाशिंगटन पोस्ट को बताया कि जनरल ने यह साफ संदेश राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और प्रधानमंत्री युसुफ रजा गिलानी के साथ हुई बैठक के दौरान दिया। जनरल ने जोर देकर कहा कि सरकार को भ्रष्टाचार को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार बाढ़ पीड़ितों की मदद करने में भी लड़खड़ा रही है। सरकार को इस संबंध में भी ठोस कार्रवाई करनी चाहिए।

हालांकि अखबार ने यह भी कहा है कि पाकिस्तान में सेना अभी सत्ता हथियाने के पक्ष में नहीं है लेकिन वह सरकार पर दबाव जरूर बढ़ाएगी।

मुशर्रफ ने किया आगाह

राष्‍ट्रपति की कुर्सी पर नजरें गड़ाए पाकिस्‍तान के पूर्व सैन्‍य प्रमुख परवेज मुशर्रफ ने आगाह किया है कि देश में एक बार फिर तख्‍तापलट के आसार हैं। उन्‍होंने कहा कि पाकिस्‍तान में इस समय काफी सियासी उठापटक मची है। इसलिए देश की कमान सेना को सौंप देनी चाहिए।

1999 में सैन्‍य तख्‍तापलट के जरिये सत्‍ता में आए मुशर्रफ को 2008 में गद्दी छोड़नी पड़ी थी। फिलहाल वह लंदन में स्‍व-निर्वासित जीवन बिता हैं। उन्‍होंने कहा कि मौजूदा सैन्‍य प्रमुख जनरल अशफाक परवेज कयानी को ‘अलोकप्रिय’ राष्‍ट्रपति आसिफ अली जरदारी के खिलाफ दखलअंदाजी के लिए कहा जा सकता है।

इस हफ्ते कयानी, जरदारी और प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी के बीच हुई आपात बैठक के बारे में चर्चा करते हुए मुशर्रफ ने लंदन में कहा, ‘राष्‍ट्रपति और प्रधानमंत्री की मीटिंग की तस्‍वीरों को देखकर ऐसा नहीं लगता कि वे मौसम के बारे में चर्चा कर रहे हैं। यह कुछ अलग किस्‍म की चर्चा थी और इस समय निश्चित तौर पर सेना प्रमुख पर कई तरह के दबाव होंगे।’

मुशर्रफ ने कहा कि जब उन्‍होंने पाकिस्‍तान के सैन्‍य प्रमुख की कुर्सी संभाली थी तो पहले साल भी उन पर कुछ ऐसे ही दबाव थे जिसके चलते तत्‍कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के खिलाफ तख्‍तापलट करना पड़ा। उन्‍होंने कहा, ‘उस एक साल में पाकिस्‍तान गर्त में जाने लगा। राजनेताओं समेत कई लोग मुझसे कहने लगे कि आप कोई कार्रवाई क्‍यों नहीं कर रहे हैं। क्‍या आप पाकिस्‍तान का भला नहीं चाहते।’

मुशर्रफ ने कहा कि देश को मौजूदा संकट से उबारने के लिए सत्‍ता की कमान सेना को सौंप देनी चाहिए। यदि ऐसा होता है तो देश में शांति और स्थिरता आएगी। गौरतलब है कि 1947 में आजाद होने के बाद पाकिस्‍तान में आधे से अधिक समय तक सेना का ही शासन रहा है।

मुशर्रफ ने दोहराया कि वह शुक्रवार को लंदन में ‘ऑल पाकिस्‍तान मुस्लिम लीग’ नाम से नई पार्टी लॉन्‍च करेंगे और 2013 में पाकिस्‍तान में होने वाले आम चुनाव में हिस्‍सा लेंगे। हालांकि उन्‍होंने यह बताने से इनकार कर दिया कि वह पाकिस्‍तान कब लौट रहे हैं जहां उनके खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा चलाया जा सकता। इसके अलावा मुशर्रफ पहले भी कह चुके हैं कि सत्‍ता में रहने के दौरान आतंकवादियों ने उनपर दो बार हमले किए थे।

ठुकरा दी गई जनरल की मांग
सोमवार को कयानी, जरदारी और गिलानी के बीच हुई बैठक को लेकर चर्चा है कि इस दौरान देश में व्‍याप्‍त भ्रष्‍टाचार और प्रशासन की नाकामी पर गंभीर बहस हुई। स्‍थानीय मीडिया के मुताबिक सैन्‍य प्रमुख ने भारी-भरकम 60 सदस्‍यीय केंद्रीय कैबिनेट से कुछ ऐसे मंत्रियों को हटाए जाने की मांग की जिनपर भ्रष्‍टाचार के मुकदमे चल रहे हैं।

हालांकि मौजूदा हुक्‍मरानों ने जनरल की इस मांग को ठुकरा दिया है। लेकिन इस बैठक के बारे में पाकिस्‍तानी मीडिया में काफी कुछ हलचल है। स्‍थानीय मीडिया में मौजूदा राष्‍ट्रपति और अन्‍य राजनेताओं के प्रति नकारात्‍मक खबरें आ रही हैं जिससे सरकार मुश्किल में पड़ गई लगती है।

Posted on Sep 30th, 2010
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Posted in :  खबर, ब्रेकिंग न्यूज, विदेश     
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