अयोध्या पर फैसलाः किस जज ने क्या कहा

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लखनऊ ।। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बहुमत से यह फैसला सुनाया कि अयोध्या में विवादित भूमि को तीन समान भागों में हिंदुओं, मुसलमानों और निर्मोही अखाड़े को बांट दिया जाए। फैसले के मुताबिक जहां भगवान राम का अस्थायी मंदिर है उस पर हिंदुओं का हक होगा।

रामजन्मभूमि – बाबरी मस्जिद ढांचे वाली विवादित जमीन के मालिकाना हक को लेकर पिछले 60 वर्ष से लंबित इस संवेदनशील मामले में अपने अलग-अलग फैसलों में जस्टिस एस. यू. खान और जस्टिस सुधीर अग्रवाल ने कहा कि तीन गुंबदों वाले ढांचे के बीच के गुंबद वाला भाग, जहां भगवान राम विराजमान हैं, हिंदुओं का है। जस्टिस खान और अग्रवाल ने कहा कि विवादित स्थल वाली 2.7 एकड़ भूमि को तीन समान भागों में बांटा जाए और उसे सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला विराजमान का प्रतिनिधित्व करने वाले पक्ष को दिया जाए। हालांकि तीसरे जज जस्टिस डीवी शर्मा ने व्यवस्था दी कि विवादित स्थल भगवान राम का जन्म स्थान है। उनके मुताबिक मुगल बादशाह बाबर द्वारा बनवाई गई विवादित इमारत इस्लामी कानून के खिलाफ थी और इस्लामी मूल्यों के अनुरूप नहीं थी।

जस्टिस खान ने कहा कि तीनों पक्षों को एक तिहाई भाग देने की घोषणा की गई है, बंटवारा करते समय अगर किसी पक्ष के हिस्से में मामूली अडजस्टमेंट किया जाता है तो इससे जिस पक्ष का नुकसान होगा उसकी भरपाई केन्द्र सरकार द्वारा अधिगृहीत भूमि के कुछ भाग से की जाएगी।

जस्टिस खान ने कहा, तीनों पक्षों – मुस्लिम, हिंदू और निर्मोही अखाड़ा – को संयुक्त रूप से उस विवादित क्षेत्र की संपत्ति (परिसर) का स्वामी घोषित किया जाता है, जैसा मुकदमा संख्या एक में अदालत द्वारा निर्धारित आयुक्त अधिवक्ता शिव शंकर लाल द्वारा तैयार नक्शा योजना एक में ए बी सी डी ई और एफ पत्रों में उल्लेख किया गया है। तीनों पक्ष एक तिहाई हिस्से का इस्तेमाल और पूजा अर्चना के लिए उसका प्रबंधन करेंगे। इस आश्य के प्रारंभिक आदेश को मंजूरी दी गई। हालांकि जज ने माना कि मध्य गुंबद के नीचे का भाग, जहां वर्तमान में अस्थायी मंदिर में मूर्ति रखी गई है उसे अंतिम आदेश में हिंदुओं को दिया जाएगा।

जस्टिस खान ने अपने फैसले के दौरान व्यवस्था दी कि विवादित ढांचे को बाबर के आदेश से अथवा उनके द्वारा मस्जिद के तौर पर तामीर किया गया, लेकिन प्रत्यक्ष साक्ष्य से यह सिद्ध नहीं हो पाया कि निर्मित भाग सहित विवादित परिसर बाबर का था अथवा उसका था, जिसने इसे बनाया। उन्होंने यह भी कहा कि मस्जिद बनाने के लिए कोई मंदिर नहीं गिराया गया, बल्कि उसका निर्माण मंदिर के खंडहरों पर किया गया, जो बहुत समय से वहां मौजूद थे।

जस्टिस अग्रवाल ने अपने आदेश में कहा, घोषित किया जाता है कि तीन गुंबदों वाले ढांचे के बीच वाले गुंबद का हिस्सा, जो भगवान राम के जन्मस्थान के रूप में विवादित है और हिंदुओं की आस्था और विश्वास के अनुसार भगवान राम का जन्मस्थान है, वह याची (भगवान राम की तरफ का पक्ष) का है और प्रतिवादियों द्वारा किसी भी तरीके से उसमें बाधा अथवा दखल नहीं दिया जाए। यह स्पष्ट किया जाता है कि इस आदेश के द्वारा याची (भगवान राम की तरफ का पक्ष) के हिस्से में तीन गुंबद वाले ढांचे के बीच वाले गुंबद के भाग को भी जोड़ा जाए। जस्टिस अग्रवाल ने कहा कि बाहरी प्रांगण में स्थित राम चबूतरा, सीता रसोई और भंडार के ढांचों को निर्मोही अखाड़े के हिस्से में जोड़ा जाए और किसी व्यक्ति के इससे बेहतर मालिकाना हक की स्थिति में न होने पर उसे इसका कब्जा सौंप दिया जाए।



Posted on Sep 30th, 2010
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Posted in :  ब्रेकिंग न्यूज     
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