चीन सीमा पर भारतीय वायुसेना

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नई दिल्ली ॥ लद्दाख में भारत चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा के ठीक 23 किलोमीटर पीछे न्योमा में इंडियन एयरफोर्स एक मॉडर्न एयर बेस बना रही है। भविष्य में हर तरह के लड़ाकू विमान और बड़े परिवहन विमान इस वायुसैनिक अड्डे से उड़ान भर सकेंगे।
भारतीय वायुसेना ने करीब एक साल पहले 13,300 फीट की ऊंचाई पर स्थित न्योमा में एक हवाई पट्टी बना कर वहां एएन-32 परिवहन विमान उतारा था। अब इसी हवाई पट्टी को पूर्ण स्तर का वायुसैनिक अड्डा बनाने की योजना है। वायुसेना मुख्यालय ने इस आशय का प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय के विचारार्थ काफी पहले भेजा है और जल्द ही इसे मंजूरी मिलने की उम्मीद है।
वायुसेना का लेह स्थित वायुसैनिक अड्डा अब तक सबसे ऊंचे 11 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है। अक्सर लेह पर मौसम खराब हो जाने की वजह से वहां हवाई गतिविधि नहीं हो पाती इस वजह से न्योमा वायुसैनिक अड्डा एक वैकल्पिक वायुसैनिक अड्डे के तौर पर विकसित होगा।
यहां पश्चिमी वायुसैनिक कमांड के प्रमुख एयर मार्शल एन. ए. के. ब्राउन ने न्योमा वायुसैनिक अड्डे के विस्तार की योजना की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि इस वायुसैनिक अड्डे पर सुखोई-30 एमकेआई जैसे बड़े लड़ाकू विमान भी उड़ाए जा सकेंगे। वास्तव में वहां से भारतीय वायुसेना के बेड़े में मौजूद सभी तरह के विमान संचालित किए जा सकेंगे। योजना के अनुरूप पूरी तरह न्योमा वायुसैनिक अड्डे को बनाने में चार साल तक का समय लग सकता है।
चीन द्वारा भारत से लगे तिब्बत के इलाकों में कई तरह की ढांचागत सैन्य सुविधा बनाए जाने के मद्देनजर भारत की ओर से इस तरह का पहला बड़ा सैन्य ढांचा बनाया जाएगा। न्योमा वायुसैनिक अड्डा चूंकि चीन से लगी वास्तविक नियंत्रण रेखा के महज 23 किमी. ही पीछे है इसलिए इसका विशेष रणनीतिक महत्व है। वास्तव में यह वायुसैनिक अड्डा चीन के लिए चिंता का कारण बन सकता है। लेकिन यहां रक्षा सूत्रों के मुताबिक भारत की ओर से यह फैसला तब लिया गया है जब चीन ने अपने इलाके में छह से अधिक वायुसैनिक अड्डों का विकास कर लिया है। एयर मार्शल ब्राउन ने कहा कि चीन द्वारा अपने इलाके में विकसित की जा रही ढांचा गत सैन्य सुविधा पर भारत की निगाह है और इसके मद्देनजर भारत भी जवाबी तैयारी कर रहा है।
उल्लेखनीय है कि एयरफोर्स ने पिछले कुछ समय में लद्दाख से लगी वास्तविक नियंत्रण रेखा पर ही फुकचे और दौलत बेग ओल्दी (डीओबी) नाम की दो और हवाई पट्टियां विकसित की है। लेकिन पूर्ण स्तर का वायुसैनिक अड्डा बनाना काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दौलत बेग ओल्दी करीब 16 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है। पश्चिमी वायुसैनिक कमांड की यह जिम्मेदारी है कि वह चीन और पाकिस्तान से लगी तीन हजार किलोमीटर से भी अधिक की सीमा पर हमेशा चौकस निगाह रखे और भारत के सुरक्षा हितों की रक्षा के लिए सरकार को सचेत करे।

Posted on Oct 2nd, 2010
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Posted in :  खबर, हिंदुस्तान     
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