चीन की चाल, तीन देशों का मसला बने कश्‍मीर

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जम्‍मू कश्‍मीर को लेकर चीन के नए पैंतरे ने भारत की चिंता बढ़ा दी है। चीन इस बात की कोशिश में जुटा है कि कश्‍मीर मसले का समाधान केवल भारत और पाकिस्‍तान के बीच ही नहीं बल्कि इसमें उसकी भी ‘दखलंदाजी’ हो।

चीन का जम्‍मू कश्‍मीर में लद्दाख के 38 हजार किलोमीटर इलाके पर पहले ही कब्‍जा है। इसके अलावा इस्‍लामाबाद पाकिस्‍तान के कब्‍जे वाले कश्‍मीर की 5000 किलोमीटर जमीन बीजिंग को सौंप चुका है। बीजिंग पाकिस्‍तान के कब्‍जे वाले कश्‍मीर में सड़क मार्ग बना रहा है जिससे पश्चिम एशिया में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है।

इससे पहले चीन की नीति अमेरिका सहित दुनिया की अन्‍य बड़ी शक्तियों की तरह रही है। इनका मानना है कि भारत और पाकिस्‍तान को कश्‍मीर मसला आपस में शांतिपूर्वक सुलझा लेना चाहिए। लेकिन हाल में कश्‍मीरियों के लिए अलग वीजा जारी करने और भारतीय सेना के एक वरिष्‍ठ अधिकारी को वीजा देने से इन्‍कार करने की घटना सामने आने से साफ हो गया है कि ड्रैगन का पैंतरा बदल रहा है।

आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार कश्‍मीर पर चीन के नए रुख से चिंतित है। सरकार को इस बात की आशंका है कि चीन पाकिस्‍तान की तुलना में अधिक खतरनाक साबित हो सकता है। चीन ने हाल में कहा था कि विवाद पाकिस्‍तान के कब्‍जे वाले कश्‍मीर पर नहीं, बल्कि भारतीय कश्‍मीर को लेकर है। भारत ड्रैगन के इस बयान पर अपनी चिंताएं जाहिर कर दी थीं।

चीन ने जम्‍मू कश्‍मीर के लोगों को नत्‍थी वीजा जारी किए जाने के अपने रुख में किसी तरह के बदलाव के संकेत नहीं दिए हैं। वहीं भारत भी चीन के समक्ष सीमा विवाद सहित कई मुद्दे उठाता रहेगा। पाकिस्‍तान के कब्‍जे वाले कश्‍मीर में चीनी सेना की बढ़ती मौजूदगी के बारे में सूत्रों ने कहा कि बीजिंग और इस्‍लामाबाद के संबंधों में कश्‍मीर अहम भूमिका निभा रहा है।

सूत्रों के मुताबिक कश्‍मीर पर चीन की नई नीति से जुड़ी खबरों के बावजूद भारत इससे अपने रिश्‍ते खराब नहीं करना चाहता। हालांकि केंद्र ने चीन के साथ अपने संबंधों के बारे में कोई आखिरी फैसला भी नहीं किया है। लेकिन वह अपनी चिंताओं से ड्रैगन को अवगत कराता रहेगा।

Posted on Oct 14th, 2010
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Posted in :  खबर, बड़ी खबर, विदेश     
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