सुनवाई चलती रही, कसाब मुस्कराता रहा

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अजमल कसाब को सुनाई गई मौत की सजा पर पुष्टि के लिए बांबे हाई  कोर्ट में सोमवार को सुनवाई शुरू हुई। सुनवाई के दौरान वह  मुस्कराता रहा। उसने कई बार जम्हाई ली और सिर खुजलाता नजर  आया। उसके हावभाव यही जाहिर कर रहे थे कि उसे अपने किए पर  कोई  पछतावा नहीं है।

मुंबई पर हमला करने पाकिस्तान से कसाब और नौ अन्य आतंकी आए थे। उनके बर्बर अपराधों का विवरण देते हुए सरकारी वकील उज्ज्वल निकम ने कहा, ’26 नवंबर, 2008 का हमला राज्य [पाकिस्तान] प्रायोजित आतंकवाद था और इसे वहां के सुरक्षा तंत्र की मदद से लश्कर-ए-तैयबा ने अंजाम दिया।’

न्यायाधीश रंजना देसाई और आरवी मोरे के समक्ष अदालत क्रमांक 49 में दलीलें शुरू हुई। इसमें कसाब केंद्रीय कारागार से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये पेश हुआ। वहां उसे भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच बम और बुलेट प्रूफ कोठरी में रखा गया है।

कसाब [23] सुबह ठीक 11 बजे अदालत में बने बड़े पर्दे पर दिखा। ऐसा लगा कि कार्यवाही में उसकी कोई दिलचस्पी नहीं है। पूरे समय उसे मुस्कराते और जम्हाई लेते देखा गया। कई बार उसे अपना सिर खुजलाते, जेल की ड्रेस के बटन से खेलते और बांहें फैलाते भी देखा गया।

सूत्रों ने बताया कि यह पहली बार है जब सजा-ए-मौत की पुष्टि के लिए बांबे हाई कोर्ट में वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये जिरह हो रही है। न्यायालय के सभी प्रवेश द्वारों पर पुलिस बल की भारी तैनाती की गई थी। समूची अदालत किले में तब्दील कर हो गई थी। वकीलों, मीडियाकर्मियों और अदालत के स्टाफ को अदालत 49 में सुनवाई में शामिल होने के लिए विशेष प्रवेश पास दिए गए थे।

गत छह मई को निचली अदालत ने कसाब को सजा-ए-मौत सुनाई थी। कानून के अनुसार मृत्यु-दंड की पुष्टि के लिए मामला हाई कोर्ट स्थानांतरित कर दिया गया।

सरकारी वकील निकम ने कहा कि लश्कर-ए-तैयबा ने भारत को अस्थिर करने, देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने और वित्ताीय नुकसान पहुंचाने के लिए षड्यंत्र रचा जिसमें भारत, ब्रिटेन, अमेरिका, इजरायल और अन्य देशों के नागरिकों सहित 166 लोग मारे गए।

Posted on Oct 19th, 2010
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Posted in :  अपराध     
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