चीन का ‘असली चेहरा’, भारत-तिब्‍बत सीमा पर बनाई सुरंग

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बीजिंग. भारत की सीमा तक हाई-वे बनाने की राह में चीन ने आखिरी बाधा पार कर ली है। इस सड़क पर 3.3 किमी (3310मीटर) की आखिरी सुरंग का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है। चीन के सरकारी टेलीविजन ने बुधवार को सुरंग निर्माण स्थल से कुछ सीधी तस्वीरें प्रसारित कीं।

विस्फोट के जरिए सुरंग का दूसरा छोर खुलने के बाद इसके निर्माण में जुटे मजदूरों को इन तस्वीरों में जश्न मनाते दिखाया गया। समुद्र तल से 3,750 मीटर की ऊंचाई पर बर्फ से ढंके गैलोंग्ला पर्वत पर यह सुरंग बनाई गई है। इसके निर्माण में पूरे दो साल लगे।

तिब्बत में मोशुओ काउंटी (तिब्बती में मेटोक) भारत के अरुणाचल प्रदेश से लगा वहां का आखिरी क्षेत्र है। यहां अब तक कोई हाई-वे नहीं है। इस स्थान का सामरिक महत्व है क्योंकि अरुणाचल को चीन दक्षिण तिब्बत का हिस्सा कहता है। यहीं से ब्रह्मïपुत्र नदी भारत में प्रवेश करती है। इस 117 किलोमीटर के हाई-वे के बन जाने के बाद मेटोक नजदीकी बोमी काउंटी से जुड़ जाएगा। बोमी काउंटी तक चीन को जोडऩे वाली सड़क पहले ही मौजूद है।

इससे पहले, चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ बुधवार को तीन दिवसीय भारत यात्रा पर दिल्ली पहुंचे। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच की बातचीत मुख्य तौर पर वित्त और व्यापार के मुद्दों पर केंद्रित रहने की संभावना है। भारतीय पक्ष कश्मीर के लोगों को चीन द्वारा नत्थी वीजा देने जैसे विवादित मसलों की ओर भी ध्यान खींचेगा।

असल परीक्षा आज
यात्रा के पहले दिन वेन बुधवार को जहां भी गए, अपने शब्दों को चाशनी में लपेटते दिखे। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा उनके सम्मान में दिए गए रात्रि भोज में भी उन्होंने आपसी सहयोग बढ़ाने पर बल दिया। वेन ने कहा, ‘मेरी इस यात्रा का मकसद दोनों देशों के बीच दोस्ती और सहयोग बढ़ाना है। दोनों देश साझीदार हैं, प्रतिस्पर्धी नहीं। दुनिया में दोनों देशों की समृद्धि और विकास के लिए पर्याप्त जगह है। ऐसे कई क्षेत्र हैं, जहां हम सहयोग कर सकते हैं।’ उनकी ये मीठी बातें भारतीय चिंताओं को कितना दूर करेंगीं, इसका असल परीक्षण आज होगा।

गुरुवार को भारतीय विदेश मंत्री एसएम कृष्णा होटल ताज में जियाबाओ से मुलाकात करेंगे। इसके बाद दोनों देशों के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की औपचारिक बातचीत होगी। भारतीय बाजार पर नजर गड़ाए चीनी प्रधानमंत्री का मुख्य फोकस वित्त, व्यापार और वाणिज्य के मुद्दों पर होगा। दोनों देशों में वित्तीय सेवा समझौता होने की भी संभावना है।

Posted on Dec 16th, 2010
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Posted in :  विदेश     
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